पीएम मोदी की डिग्री मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने की सुनवाई, अरविंद केजरीवाल की अपील पर सुनाया यह फैसला….
पीएम मोदी की डिग्री मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने की सुनवाई, अरविंद केजरीवाल की अपील पर सुनाया यह फैसला….
अहमदाबाद | गुजरात हाई कोर्ट से आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी है. केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री दिखाने की मांग की थी. सीआईसी (CIC) ने गुजरात यूनिवर्सिटी को डिग्री दिखाने का आदेश दिया था. लेकिन हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया था. साथ ही केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था. केजरीवाल ने इस फैसले को चुनौती दी थी. अब गुजरात हाई कोर्ट ने उनकी अपील ठुकरा दी है. कोर्ट ने उन पर लगा 25,000 रुपये का जुर्माना भी बरकरार रखा है.
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 31 मार्च, 2023 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया.
पीठ ने कहा कि जिस फैसले को चुनौती दी गई है उसमें कोई त्रुटि नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने बिना कोई अतिरिक्त जुर्माना लगाए अपील खारिज कर दी.
मार्च 2023 में हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया था. कोर्ट ने गुजरात यूनिवर्सिटी की अर्जी स्वीकार की थी. इसके साथ ही सीआईसी (CIC) का 2016 वाला आदेश रद्द कर दिया था. उस आदेश में पीएम मोदी की डिग्री की जानकारी देने को कहा गया था. कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था.
अपील की कार्यवाही के दौरान, केजरीवाल के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माने के आधार को चुनौती दी थी. उन्होंने तर्क दिया था केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री प्राप्त करने के लिए ‘लगातार प्रयास’ नहीं किया था जैसा कि एकल न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी.
सिंघवी ने यह भी तर्क दिया था कि सीआईसी ने ‘स्वतः संज्ञान’ लिया था और केजरीवाल को औपचारिक आरटीआई आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर प्रतिवादी बनाया था.
अदालत के समक्ष एक अन्य मुद्दा गुजरात विश्वविद्यालय का यह दावा था कि डिग्री पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध थी.
केजरीवाल के वकीलों ने एकल न्यायाधीश के समक्ष एक पुनर्विचार याचिका में तर्क दिया था कि डिग्री वास्तव में कभी भी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई थी लेकिन इस दलील को खारिज कर दिया गया था.
सिंघवी ने तर्क दिया था कि यदि डिग्री वास्तव में ऑनलाइन उपलब्ध थी तो सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई का आधार नहीं बचता.
गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपील का विरोध किया था. उन्होंने तर्क दिया था कि केजरीवाल ने इस मामले को लगातार आगे बढ़ाया था और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी जिससे विश्वविद्यालय के अनुसार संस्थान की बदनामी हुई थी.
मेहता ने सुझाव दिया था कि सूचना के अधिकार अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने और सरकारी अधिकारियों को ऐसे अनुरोधों से निपटने में उत्पादक कार्य समय बर्बाद करने से बचाने के लिए जुर्माना लगाया जाना चाहिए.
यह विवाद 2016 का है, जब केजरीवाल ने सीआईसी को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री का खुलासा करने की मांग की थी और कहा था कि उन्हें अपने से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी क्यों ‘छिपाई’ जा रही है.
BY IANS
पीएम मोदी डिग्री मामला: गुजरात हाई कोर्ट ने केजरीवाल की 25,000 रुपए के जुर्माने के खिलाफ अपील खारिज की
