दिल की बीमारी के ये शुरुआती संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें शरीर कैसे देता है चेतावनी
सांकेतिक तस्वीर (आईएएनएस)
दिल की बीमारी के ये शुरुआती संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें शरीर कैसे देता है चेतावनी
नई दिल्ली । दिल हमारे शरीर का वह हिस्सा है, जो बिना रुके दिन-रात काम करता रहता है. दिल लगातार शरीर के हर हिस्से तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. परेशानी तब शुरू होती है, जब दिल या उसे खून पहुंचाने वाली नसों में किसी तरह की समस्या पैदा होने लगती है. कई बार शरीर इसकी जानकारी अचानक नहीं देता, बल्कि उससे पहले छोटे-छोटे संकेत देता रहता है. दिक्कत यह है कि इन संकेतों को अक्सर गैस, थकान, तनाव, कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. इस मौके पर कई संस्थान कैंपेन के जरिए लोगों को दिल की बीमारी के उन संकेतों के बारे में जागरूक करते है, जिन्हें लोग अक्सर हल्के में ले लेते है.
दिल की बीमारी का मतलब सिर्फ हार्ट अटैक नहीं है. कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेलियर और दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याएं भी इसके दायरे में आती हैं. इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को समझना जरूरी है. मेडिकल रिसर्च और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की जानकारी के मुताबिक इन संकेतों पर खास तौर पर ध्यान देना जरूरी है.
सीने में दबाव, भारीपन या जलन: हार्ट अटैक में हमेशा तेज दर्द ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन, जलन या असहजता भी चेतावनी हो सकती है. यह कुछ मिनट तक रह सकती है या बीच में ठीक होकर दोबारा शुरू हो सकती है. इसे सिर्फ गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
सांस फूलना: सामान्य काम करने, थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पहले के मुकाबले ज्यादा सांस फूलने लगे तो इसे भी गंभीरता से लेना चाहिए. हार्ट फेलियर में सांस फूलना धीरे-धीरे बढ़ सकता है और कुछ लोगों को रात में अचानक सांस लेने में परेशानी के कारण नींद से उठना पड़ सकता है.
बिना वजह ज्यादा थकान: अगर रोज के सामान्य काम करने में भी असामान्य थकान महसूस हो रही है, तो इसका कारण सिर्फ नींद की कमी या काम का दबाव नहीं हो सकता. खासकर महिलाओं में असामान्य थकान और कमजोरी हार्ट अटैक से जुड़े लक्षणों में शामिल हो सकते हैं.
हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द: दिल से जुड़ी परेशानी का असर सिर्फ सीने तक सीमित नहीं रहता. दर्द या दबाव एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंच सकता है. महिलाओं में पीठ, कंधे या जबड़े का दर्द कभी-कभी कम सामान्य लगने वाला हार्ट अटैक लक्षण हो सकता है.
पैरों और टखनों में सूजन: पैरों, टखनों या शरीर के दूसरे हिस्सों में लगातार सूजन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हार्ट फेल्योर में दिल की पंपिंग क्षमता कम होने पर शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है, जिससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है.
चक्कर आना या सिर हल्का लगना: अचानक चक्कर, कमजोरी या सिर हल्का लगना कई कारणों से हो सकता है, लेकिन अगर इसके साथ सीने में परेशानी, सांस फूलना या पसीना आए तो तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है.
बिना वजह पसीना आना: अचानक पसीना आना हार्ट अटैक के चेतावनी संकेतों में शामिल है. अगर इसके साथ सीने में दबाव या सांस फूलने जैसी समस्या भी हो तो इसे इमरजेंसी की तरह लेना चाहिए.
इनमें से कोई एक लक्षण दिखने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से दिल की बीमारी है, लेकिन अगर लक्षण नए हैं, बार-बार हो रहे हैं, बढ़ रहे हैं या कई संकेत एक साथ दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
डॉक्टर जरूरत के अनुसार, ईसीजी, ब्लड टेस्ट, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, सीटी या कोरोनरी एंजियोग्राम जैसी जांच करा सकते हैं.
दिल को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर और डायबिटीज का सही नियंत्रण जरूरी है.
IANS
