कौन हैं गालिबाफ जो पाकिस्तान में ईरानी डेलीगेशन को कर रहे हैं लीड ?
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ की फाइल फोटो / (क्रेडिट : आईएएनएस)
कौन हैं गालिबाफ जो पाकिस्तान में ईरानी डेलीगेशन को कर रहे हैं लीड ?
नई दिल्ली | ईरानी संसद के स्पीकर इन दिनों काफी चर्चा में है. विदेशी मीडिया (खासकर अमेरिकी और यूरोपीय) ने उनको पिछले दिनों सुर्खियों में बनाए रखा. दावा किया गया कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पसंद हैं, हालांकि गालिबाफ के सोशल मीडिया पोस्ट्स में आक्रामकता साफ दिखती है.
हाल ही में पॉलिटिको ने अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया था कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबाफ को एक संभावित पार्टनर और यहां तक कि भविष्य के नेता के रूप में भी देख रही है. कथित तौर पर एक प्रशासनिक अधिकारी ने पॉलिटिको से खुलासा किया कि वह एक मजबूत विकल्प हैं, लेकिन हमें उन्हें परखना होगा और इसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
तमाम किंतु-परंतु और हवाई स्ट्राइक के बाद ईरान युद्ध में संघर्ष विराम की घोषणा हुई. संघर्ष विराम दो हफ्तों तक चलेगा. इस बीच इस्लामाबाद में बातचीत का दौर जारी है. एक बार फिर गालिबाफ खबरों में हैं क्योंकि 14-15 लोगों के प्रतिनिधिमंडल जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं को वह ही लीड कर रहे हैं.
गालिबाफ- एक पूर्व सैन्य कमांडर है जो जुझारू है और अपनी बात कहने में लाग-लपेट का इस्तेमाल नहीं करते. लंबे राजनीतिक और सैन्य अनुभव के बावजूद, वह देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद ‘राष्ट्रपति’ के लिए अब तक चुनावी जीत हासिल नहीं कर पाए है.
आईएसएनए न्यूज एजेंसी के अनुसार, 1961 में मशहद में जन्मे गालिबाफ ने कम उम्र में ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत कर दी थी. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी और 1982 में खुर्रमशहर को इराकी कब्जे से मुक्त कराने वाले अभियानों में भी हिस्सा लिया था.
बाद के वर्षों में गालिबाफ ने सुरक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में कई अहम पद संभाले. 1997 में वह आईआरजीसी के एयरफोर्स कमांडर बने, जबकि 2000 में उन्हें ईरान का राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया. 2005 में वह तेहरान के मेयर चुने गए और करीब 12 वर्षों तक इस पद पर बने रहे.
राजनीतिक करियर में उनका सबसे बड़ा मुकाम 2020 में आया, जब वह ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर बने. उन्हें देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के पुत्र मुजतबा खामेनेई का करीबी माना जाता है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं.
इसके बावजूद, गालिबाफ का राष्ट्रपति बनने का सपना अधूरा रहा है. वह तीन बार राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल हुए लेकिन हर बार उन्हें असफलता हाथ लगी. 2017 में उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस लेते हुए कट्टरपंथी खेमे के उम्मीदवार इब्राहिम रईसी का समर्थन किया था.
आईएएनएस
पाकिस्तान में ईरानी डेलीगेशन: लीड कर रहे गालिबाफ आखिर कौन?
