जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म की
जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म की
नई दिल्ली/कानपुर । जीएसटी परिषद ने गुरुवार को हुई 57वीं बैठक में व्यापार में आसानी से उद्देश्य से कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति को खत्म कर दिया है. साथ ही, मुकदमा चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया है. यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से दी गई.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस वार्ता में कहा कि पिछले साल सरकार ने जीएसटी की दरों को कम किया था. इस साल हमने प्रक्रिया को आसान बनाने पर फोकस किया है.
सीतारमण ने कहा, “पंजीकरण में सामान्य बदलावों को अपने-आप अनुमति देने को मंजूरी जीएसटी परिषद ने दे दी है. अब रिफंड तेजी से जारी होंगे और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटकर 10 दिन हो जाएगी. साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे.”
ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए पंजीकरण को आसान बनाने पर उन्होंने कहा, “ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स के प्लेटफॉर्म पर छोटे ब्रिकेताओं के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आसान प्रक्रिया से छोटे बिजनेस को हर राज्य में बिजनेस की जगह बनाए बिना सामान बेचने में मदद मिलेगी.”
इसके अलावा, जीएसटी परिषद ने यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर जीएसटी को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया. ज्यादातर राज्यों ने यूपीआई एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी को लेकर चिंता जताई. नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत ज्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की योजना है.
जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक अहम समय पर आया है. नए यूपीआई फ्रेमवर्क में, कुछ शर्तों और छूट के साथ, 2,000 रुपए से ज्यादा के खास ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर तय किया गया है.
सरकार के मुताबिक, ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ यूपीआई ट्रांजैक्शन में से लगभग 96 प्रतिशत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल सेठ ने गुरुवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए निर्णय उद्योग और व्यापार जगत के लिए काफी महत्वपूर्ण और सकारात्मक हैं. लंबे समय से उद्यमियों और व्यापारियों की मांग रही है कि जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाया जाए और छोटी तकनीकी अथवा प्रक्रियागत गलतियों पर अनावश्यक रूप से कड़ी कार्रवाई न हो. इस दिशा में काउंसिल द्वारा किए गए बदलाव निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं. मैं जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त करने और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का स्वागत करता हूं.”
अतुल सेठ ने आगे कहा, “एक उद्यमी के रूप में मेरा मानना है कि इससे ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों और उद्यमियों में काफी विश्वास पैदा होगा. कर संबंधी मामलों में गलती और जानबूझकर की गई कर चोरी के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए और यह निर्णय इसी भावना को मजबूत करता है. इसी प्रकार छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है. रिफंड प्रक्रिया को तेज करने और पंजीकरण में सामान्य बदलावों को आसान बनाने से व्यापारियों की कार्यशील पूंजी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए जीएसटी पंजीकरण को सरल बनाने का निर्णय भी छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ने में मदद करेगा.”
IANS/Hindi Post Dot In
जीएसटी परिषद ने कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म की, मुकदमा चलाने की सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया
