टीएमसी में मची भगदड़? काकोली घोष के बाद अब इस बड़े नेता ने छोड़ा पद…., पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप
(फोटो: ट्विटर )
टीएमसी में मची भगदड़? काकोली घोष के बाद अब इस बड़े नेता ने छोड़ा पद…., पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप
कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी कलह और बगावत अब खुलकर सामने आ गई है. वरिष्ठ नेता, प्रसिद्ध चिकित्सक और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन ने गुरुवार को पार्टी के ‘राष्ट्रीय प्रवक्ता’ पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस संबंध में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक बेहद तीखा पत्र भेजा है.
शांतनु सेन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा दिए गए फैसले को स्वीकार करते हुए इस पद को छोड़ने का निर्णय लिया है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं.
“दिल गवाही नहीं देता था, फिर भी टीवी पर अनैतिक कामों का बचाव करना पड़ा”
ममता बनर्जी को भेजे अपने त्यागपत्र में शांतनु सेन ने पार्टी नेतृत्व और उसकी कार्यशैली पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा, “मैं तृणमूल कांग्रेस के जन्म (1998) से ही पार्टी का एक वफादार सिपाही रहा हूं. कई मुश्किल समय में, जब मेरा दिल गवाही नहीं देता था, तब भी मैंने मीडिया में सार्वजनिक रूप से पार्टी का बचाव किया. इसके लिए मुझे आम जनता की काफी खरी-खोटी भी सुननी पड़ी.”
उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन अब, जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और नौकरी चोरी (भर्ती घोटाले) जैसे अनैतिक व भ्रष्ट कामों की वजह से जनता ने हमें पूरी तरह नकार दिया है, तो मेरा दिल एक प्रवक्ता के रूप में इन गलतियों का बचाव करने की गवाही बिल्कुल नहीं देता. इसीलिए मैं जनता के इस फैसले का सम्मान करते हुए प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे रहा हूं.”

सुवेंदु अधिकारी को बधाई देने से असहज हुई थी टीएमसी
राजनीतिक गलियारों में हलचल तब और बढ़ गई थी जब कुछ दिनों पहले डॉ. शांतनु सेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर राज्य में नव-निर्वाचित भाजपा सरकार को बधाई दी थी और नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया था. इसके बाद बुधवार को उन्होंने आरजी कर कांड पर खुलकर बोलते हुए कहा था कि वह इस जघन्य हत्याकांड की दोबारा निष्पक्ष जांच के लिए नई सरकार को हर संभव मदद देने के लिए तैयार हैं. उनके इन बयानों ने तृणमूल कांग्रेस को बेहद असहज स्थिति में डाल दिया था.
आरजी कर कांड पर पहले भी उठा चुके हैं आवाज
यह पहली बार नहीं है जब डॉ. सेन ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ रुख अपनाया हो. अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद उन्होंने सरकारी अस्पतालों में फैले भ्रष्टाचार और ‘थ्रेट कल्चर’ के खिलाफ आवाज उठाई थी. उस समय टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें दल-विरोधी बयानबाजी के आरोप में निलंबित कर प्रवक्ता पद से हटा दिया था. हालांकि बाद में उन्हें वापस यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी.
विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक उलटफेर; बिखर रही है टीएमसी
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल दिया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 208 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल कर राज्य में सरकार बनाई है, जबकि सत्ता से बेदखल हुई तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है. इस ऐतिहासिक हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष का विस्फोट हो गया है. पार्टी के कई कद्दावर नेता अब खुलेआम मान रहे हैं कि कट-मनी (जबरन वसूली), संस्थागत भ्रष्टाचार और आरजी कर कांड को लेकर जनता में भारी आक्रोश था, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है.
