टूटी पसलियां भी नहीं तोड़ सकीं हौसला: अस्पताल के कपड़ों और चेस्ट-ड्रेन पाइप के साथ NEET परीक्षा देने पहुंची सृष्टि दुबे

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

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टूटी पसलियां भी नहीं तोड़ सकीं हौसला: अस्पताल के कपड़ों और चेस्ट-ड्रेन पाइप के साथ NEET परीक्षा देने पहुंची सृष्टि दुबे

 

कोलकाता | कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो किस्मत और परिस्थितियां भी आपके सामने घुटने टेक देती हैं. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है नीट (NEET UG 2026) की अभ्यर्थी सृष्टि दुबे ने. महज एक हफ्ता पहले हुए खौफनाक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने, नौ पसलियां टूट जाने और फेफड़ों में गंभीर चोट आने के बावजूद यह जांबाज छात्रा रविवार को मेडिकल उपकरणों के बीच नीट री-एग्जाम में शामिल हुई. जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद भी परीक्षा देने का सृष्टि का यह जज्बा आज देशभर के युवाओं के लिए मिसाल बन गया है.

14 जून का वो खौफनाक हादसा और जिंदगी की जंग

सृष्टि के पिता श्रीराम शिवजी दुबे (जो एक प्राथमिक शिक्षक हैं) के मुताबिक, 14 जून को सृष्टि एक बेहद गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी. हादसा इतना भयानक था कि सृष्टि की नौ पसलियां टूट गईं और उसके फेफड़ों में गंभीर चोट आई. उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसका एक बड़ा वैस्कुलर ऑपरेशन (Vascular Operation) हुआ. उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि उसे कुछ समय के लिए कृत्रिम वेंटिलेशन (लाइफ सपोर्ट) पर भी रखना पड़ा था.

अस्पताल के कपड़ों और मेडिकल पाइप्स के बीच परीक्षा देने की जिद

असहनीय दर्द के बावजूद सृष्टि की आंखों में डॉक्टर बनने का सपना जिंदा था. उसने ठान लिया था कि वह सालभर की अपनी मेहनत को बेकार नहीं जाने देगी और किसी भी हाल में परीक्षा देगी. डॉक्टरों ने जब उसकी इस जिद और हौसले को देखा तो उन्होंने भी उसका साथ दिया.

चूंकि सृष्टि बिना मेडिकल सपोर्ट के हिल भी नहीं सकती थी, इसलिए उसके पिता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर विशेष अनुमति की गुहार लगाई. सृष्टि की मांग थी कि उसे अस्पताल की पोशाक (Hospital Uniform) और छाती में लगी ‘चेस्ट ड्रेन’ (Chest Drain) जैसी मेडिकल पाइप्स व उपकरणों के साथ ही परीक्षा में बैठने की इजाजत दी जाए.

ग्राउंड फ्लोर पर बना विशेष आईसीयू-रूम, बाहर खड़ी रही एम्बुलेंस

सृष्टि के इस अदम्य साहस को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए. कोलकाता के धाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर सृष्टि के लिए विशेष इंतजाम किए गए.

• वह सीढ़ियां नहीं चढ़ सकती थी, इसलिए परीक्षा केंद्र के भूतल (Ground Floor) पर एक अलग कमरा तैयार किया गया.
• परीक्षा के दौरान उसकी निगरानी के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की एक विशेष टीम कमरे में ही तैनात रही.
• किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए परीक्षा केंद्र के बाहर लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस मुस्तैद रखी गई.

शिक्षा मंत्री ने फोन कर बढ़ाया हौसला

सृष्टि का हौसला इस कदर चर्चा में रहा कि परीक्षा शुरू होते ही खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उसके पिता को फोन किया. उन्होंने सृष्टि की सेहत और परीक्षा कक्ष के इंतजामों की जानकारी ली और उसे भविष्य में एक बेहतरीन डॉक्टर बनने की शुभकामनाएं दीं.

श्रृष्टि के पिता ने मंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा, “आपकी मदद की वजह से ही मेरी बेटी आज परीक्षा दे पा रही है.”

छात्रा की मां ने भी मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि 14 जून को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बेटी परीक्षा दे सकेगी. उन्होंने कहा, “डॉक्टरों ने हमें विशेष अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी थी ताकि वे अस्पताल के कपड़ों और मेडिकल उपकरणों के साथ परीक्षा में शामिल हो सके.”

उल्लेखनीय है कि रविवार को देशभर में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नीट 2026 री-एग्जाम में हिस्सा लिया. यह पुनर्परीक्षा 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के कारण कराई गई.

 

IANS/Hindi Post Dot In

 


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