संभल हिंसा मामला: अखिलेश यादव ने उठाया सवाल, कहा- “हमारे सांसद जब संभल में थे ही नहीं तो उनके खिलाफ FIR कैसे…..”

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अखिलेश यादव की फाइल फोटो (आईएएनएस)

The Hindi Post

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी. पुलिस ने हिंसा भड़काने का आरोप समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और स्थानीय विधायक के बेटे सोहेल इकबाल पर लगाया है. दोनों नेताओं के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है. इस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है.अखिलेश यादव ने कहा कि जियाउर्रहमान बर्क हिंसा वाले दिन संभल में मौजूद ही नहीं थे.

मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने कहा, “हमारे सांसद संभल में मौजूद ही नहीं थे. फिर भी उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई …. ऐसा उदाहरण पहले कभी देखने या सुनने को मिला है क्या? एक ऑफिसर यह कह रहा था कि नेता बनना छोड़ दो.. किसकी लिए थी यह भाषा… दुखद है इस घटना में युवकों की जान गई.. मैंने लखनऊ में कहा था कि नईम की जान पुलिस की गोली से गई है. यह दंगा कराया गया है.. सरकार ने कराया है यह दंगा.. सरकार जिसने वोट की लूट की.. EVM की बटन बार-बार पुलिस से दबवाई.. प्राइवेट ड्रेस में पुलिस लगवाई.. चुनाव में इनकी धांधली न पकड़ी जाए इसलिए इन्होंने संभल में यह घटना करवाई है.”

सपा अध्यक्ष ने संभल हिंसा को लेकर ये भी कहा कि दंगा सरकार द्वारा किया गया है. कोर्ट द्वारा आदेश पारित किए जाने के तुरंत बाद ही पुलिस और प्रशासन जामा मस्जिद पर सर्वे के लिए पहुंच गया. 23 नवंबर को पुलिस प्रशासन ने कहा कि अगली सुबह 24 तारीख को दूसरा सर्वे किया जाएगा. पुलिस प्रशासन को यह आदेश किसने दिया? वहीं, जब लोगों ने सर्वे का कारण जानना चाहा तो सर्किल ऑफिसर ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया.

इसका विरोध करते हुए लोगों ने पथराव शुरू कर दिया. जवाब में पुलिस कांस्टेबल से लेकर अधिकारी तक सभी ने अपने सरकारी और निजी हथियारों से गोलियां चलाईं. जिसका वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है. इससे कई लोग घायल हुए. 5 निर्दोष लोगों की मौत हो गई. संभल का माहौल खराब करने के लिए पुलिस और प्रशासन के लोगों के साथ-साथ याचिका दायर करने वाले लोग भी जिम्मेदार हैं. ऐसे में उन्हें भी निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए ताकि लोगों को न्याय मिल सके एवं भविष्य में कोई भी संविधान के खिलाफ ऐसी गैरकानूनी घटना न कर सके.”

 


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