पूर्व नौकरशाहों ने खुला पत्र लिखकर भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर की कार्रवाई की मांग, कहा – नफरत फैला रही है
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पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के कथित नफरत भरे भाषण पर कार्रवाई की मांग की है. पूर्व नौकरशाहों ने प्रज्ञा ठाकुर पर भड़काऊ भाषण देने और नफरत फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर ने संसद सदस्य होने का नैतिक अधिकार खो दिया है.”
उन्होंने पत्र में कहा, “एक समाज के रूप में हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभद्र भाषा सुनने के अभ्यस्त हो गए हैं. विभिन्न गैर-हिंदू समुदायों के खिलाफ, मुख्य रूप से मुसलमानों के खिलाफ और हाल ही में ईसाइयों के खिलाफ, सोशल मीडिया में रोजाना जहर उगला जाता है. इन मौखिक हमलों के साथ-साथ हिंसा, उनके पूजा स्थलों पर हमले, धर्मातरण विरोधी कानून, अंतर-धार्मिक विवाह के रास्ते में बाधाएं डालना, उन्हें आजीविका से वंचित करना और समाज में उनकी हैसियत कम करने के लिए असंख्य अन्य कार्रवाइयां होती हैं.”
पत्र में उन मीडिया रिपोर्टस का हवाला भी दिया गया है, जिनमें 25 दिसंबर, 2022 को शिवमोग्गा (कर्नाटक) में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, जिन्हें ‘साध्वी प्रज्ञा’ के नाम से भी जाना जाता है, ने भीड़ को उकसाया कि अन्य समुदायों के पुरुषों से अपनी महिलाओं की रक्षा करें.
पत्र में कहा गया है, “उन्होंने (प्रज्ञा ठाकुर) लोगों से सब्जी काटने वाले चाकू को तेज धार लगा कर रखने का आग्रह किया, ताकि इन्हें कथित रूप से हिंदुओं को मारने वालों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सके. उन्होंने लोगों से कहा कि इन चाकुओं का इस्तेमाल ‘लव जिहाद’ में शामिल लोगों के सिर काटने के लिए भी किया जा सकता है. उन्होंने लोगों से कहा कि इस तरह की कार्रवाई को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई माना जाएगा.”
पत्र में कहा गया है, “..वह स्पष्ट रूप से गैर-हिंदू समुदायों के खिलाफ नफरत फैला रही हैं और उनके खिलाफ हिंसा की वकालत कर रही हैं.”
खुले पत्र (ओपन लेटर) पर हस्ताक्षर करने वालों में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग में पूर्व सचिव रही अनीता अग्निहोत्री, सलाहुद्दीन अहमद, पूर्व मुख्य सचिव (राजस्थान) और केंद्रीय परिवहन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य कर चुके एस.पी. एम्ब्रोस सहित कई अन्य पूर्व नौकरशाहों ने हस्ताक्षर किए है.
हिंदी पोस्ट वेब डेस्क/आईएएनएस
