ट्रंप ने ईसाइयों के धर्मगुरू पोप को भी नहीं “बख्शा”, जमकर सुनाई खरी-खोटी, क्या है पूरा मामला ?
फोटो: आईएएनएस
ट्रंप ने ईसाइयों के धर्मगुरू पोप को भी नहीं “बख्शा”, जमकर सुनाई खरी-खोटी, क्या है पूरा मामला ?
वाशिंगटन | ईरान के साथ जारी संघर्ष और पाकिस्तान में आयोजित बातचीत विफल होने के बाद पोप लियो XIV ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की है. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके पोप पर तीखा पलटवार किया.
ट्रंप ने उन पर अपराध रोकने में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया. साथ ही, उन्होंने विदेश नीति, ईरान और अमेरिका के घरेलू मुद्दों पर पोप के विचारों की कड़ी आलोचना भी की. ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, “पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिए बहुत बुरे हैं.” इससे व्हाइट हाउस और वेटिकन के बीच तनाव फिर से बढ़ गया.
ट्रंप ने लिखा, “पोप मेरी सरकार से ‘डर’ की बात तो करते हैं लेकिन वो उस डर के बारे में कुछ नहीं बोलते जो कोरोना के समय चर्च ने झेला था. उस वक्त चर्च में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पादरियों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा था.”
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर पोप की राय पर भी निशाना साधा और कहा कि वो उस नरमी से सहमत नहीं हैं जिसे उन्होंने (पोप ने) नरमी बताया. उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो सोचता हो कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होना ठीक है.” ट्रंप ने वेनेजुएला समेत विदेशों में अमेरिका के कामों का बचाव किया और उन्हें अमेरिका में ड्रग्स और अपराध संबंधित चिंताओं से जोड़ा और लिखा, “मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो सोचता हो कि यह बहुत बुरा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया, एक ऐसा देश जो अमेरिका में भारी मात्रा में ड्रग्स भेज रहा था. वह देश अपनी जेल खाली कर अपराधियों को हमारे देश में भेज रहा था.”
पोप की आलोचना यहीं तक नहीं रूकी. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यक्तिगत तौर पर हमला करते हुए पोप की तुलना उनके भाई से की. उन्होंने कहा, “मुझे उनका भाई लुइस उनसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि लुइस पूरी तरह से एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के समर्थक हैं. वह इसे समझते हैं और लियो नहीं!”
ट्रंप ने चुनावी जीत, अपराध में कमी और आर्थिक परफॉर्मेंस का हवाला देते हुए अपनी प्रेसीडेंसी का बचाव किया और लिखा, “मैं ठीक वही कर रहा हूं जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था, अपराध में रिकॉर्ड कम नंबर लाना और इतिहास का सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बनाना.”
एक चौंकाने वाले दावे में, ट्रंप ने कहा कि पोप का चुनाव उनके अपने राष्ट्रपति पद से जुड़ा था. उन्होंने कहा, “लियो को शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि वह सबके लिए एक हैरान करने वाला सरप्राइज थे. अगर मैं व्हाइट हाउस में नहीं होता, तो लियो वेटिकन में नहीं होते.”
उन्होंने पोप के राजनीतिक हस्तियों के साथ बातचीत की भी आलोचना की और पूर्व सलाहकार डेविड एक्सलरॉड का जिक्र करते हुए कहा, “लियो को पोप के तौर पर अपना काम ठीक से करना चाहिए. कट्टरपंथी वामपंथ की सेवा करना बंद करें और एक महान पोप बनने पर ध्यान दें, न कि एक राजनेता बनने पर.”
ये बातें ट्रंप और वेटिकन के बीच बढ़ती दरार को दिखाती हैं, जिसमें दोनों पक्ष युद्ध और डिप्लोमेसी से लेकर इमिग्रेशन और घरेलू नीति जैसे मुद्दों पर अलग-अलग राय रखते हैं. अमेरिका में जन्मे पहले पोप, पोप लियो XIV ने हाल के हफ्तों में युद्ध के खिलाफ बात की. इसके साथ ही उन्होंने ईरान से जुड़े तनाव सहित दुनिया भर के झगड़ों में संयम बरतने और बातचीत करने की अपील की है.
ईरान मुद्दे पर पोप लियो की टिप्पणी से भड़के ट्रंप, धर्मगुरु को अपराध और कूटनीति में बताया कमजोर
