इस देश को सता रहा राष्ट्रपति पुतिन का डर, यहां के सेना प्रमुख बोले – “फुल-स्केल सैन्य हमला होता है तो हम खुद को डिफेंड नहीं कर सकेंगे”
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटो: आईएएनएस)
इस देश को सता रहा राष्ट्रपति पुतिन का डर, यहां के सेना प्रमुख बोले – “फुल-स्केल सैन्य हमला होता है तो हम खुद को डिफेंड नहीं कर सकेंगे”
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं और इसका असर अब तटस्थ माने जाने वाले देशों पर भी दिखने लगा है. स्विट्ज़रलैंड के सशस्त्र बलों के प्रमुख थॉमस सुसली ने बढ़ते रूसी खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि यदि स्विट्ज़रलैंड पर पूर्ण पैमाने का सैन्य हमला होता है तो मौजूदा हालात में देश खुद की प्रभावी रक्षा करने की स्थिति में नहीं है.
स्विस अख़बार NZZ से बातचीत में सुसली ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड साइबर हमलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों से निपटने के लिए तो तैयार है लेकिन बड़े स्तर के सैन्य आक्रमण को झेलने की क्षमता फिलहाल नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि सेना को उपकरणों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और किसी आपात स्थिति में केवल करीब एक-तिहाई सैनिक ही पूरी तरह आवश्यक सैन्य साजो-सामान से लैस होंगे.
स्विट्ज़रलैंड अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है. पुराने लड़ाकू विमानों को एफ-35 से बदलने की प्रक्रिया चल रही है वहीं आर्टिलरी और ग्राउंड सिस्टम को भी उन्नत किया जा रहा है.
न्यूट्रैलिटी के सवाल पर सुसली ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन युद्ध और रूस द्वारा यूरोप को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद स्विट्ज़रलैंड की सैन्य सोच में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत है कि तटस्थ देश स्वतः सुरक्षित होते हैं. इतिहास बताता है कि न्यूट्रैलिटी तभी प्रभावी होती है जब उसे मजबूत सैन्य ताकत से सुरक्षित किया जाए.
फिलहाल स्विट्ज़रलैंड अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.7 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है जिसे बढ़ाकर एक प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.
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