संघर्ष के वो दिन जब राजू श्रीवास्तव को मुंबई में चलाना पड़ा था ऑटो रिक्शा

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फाइल फोटो
The Hindi Post

मुंबई | भारतीय कॉमेडी ने राजू श्रीवास्तव के रूप में अपना सबसे चमकीला सितारा खो दिया है. राजू का बुधवार सुबह लगभग 10:30 बजे AIIMS, नई दिल्ली में निधन हो गया. मशहूर कॉमेडियन बनने के लिए राजू की यात्रा एक कलाकार और एक व्यक्ति के रूप में संघर्षों और नए आविष्कारों से भरी हुई थी.

राजू का जन्म कानपुर में एक सरकारी कर्मचारी और कवि, रमेश चंद्र श्रीवास्तव और गृहिणी सरस्वती श्रीवास्तव के यहां हुआ था.

बचपन से ही सत्य प्रकाश श्रीवास्तव (राजू का पुराना नाम) कॉमिक कलाकार बनने चाहते थे. अपने सपने को पूरा करने के लिए राजू 1980 के दशक में मुंबई आ गए.

फाइल फोटो | फेसबुक
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शुरूआत में उन्हें काम पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा क्योंकि उस समय मुख्यधारा की फिल्म इंडस्ट्री के लिए कॉमेडी एक नई कला थी. अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए, राजू ने मुंबई की सड़को पर ऑटो-रिक्शा चलाना शुरू किया. उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी शो करना जारी रखा. स्टैंड-अप शो में प्रदर्शन कर वो 50 रुपये तक कमा लेते थे.

कुछ साल बाद, उन्हें 1988 में बॉलीवुड फिल्म ‘तेजाब’ में एक छोटी भूमिका मिली. इसके बाद उन्होंने सलमान खान अभिनीत ‘मैंने प्यार किया’ में एक और छोटी भूमिका निभाई.

राजू ने शाहरुख खान की ‘बाजीगर’ में भी अभिनय किया. बाद में, उन्हें ‘शक्तिमान’ सीरियल में एक भूमिका मिली.

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इसके बाद उन्होंने ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ में देश का ध्यान खींचा, जहां वे सेकेंड रनर-अप बने. उन्होंने ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ – चैंपियंस’ में ‘किंग ऑफ कॉमेडी का खिताब भी जीता.

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फिर वह रियलिटी टेलीविजन शो ‘बिग बॉस’, ‘नच बलिए 6’ और ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ के तीसरे सीजन में भी नजर आए.

बाद में 2014 में, उन्होंने राजनीति में कदम रखा और लोकसभा चुनाव के लिए कानपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे.

फाइल फोटो
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हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए टिकट लौटा दिया था कि उन्हें पार्टी की स्थानीय इकाइयों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है. उसके बाद, वह 19 मार्च, 2014 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.

बाद में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य किया और उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष बने. इस क्षमता में, उन्होंने आगामी नोएडा फिल्म सिटी परियोजना की नींव रखी थी.

बाधाओं से जूझना, लेकिन अपनी शर्तों पर, यह राजू श्रीवास्तव की जीवन शैली थी. पर वो अंत में जीवन की जंग हार गए. उंनका बुधवार को निधन हो गया. लेकिन वो अपने से अमर हो गए.

हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
(इनपुट्स: आईएएनएस)


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