फ्लैट में एक साल तक सड़ती रही लाश, न किसी को आई बदबू और न ही पड़ोसियों को कुछ पता चला, अब मिला कंकाल

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The Hindi Post

फ्लैट में एक साल तक सड़ती रही लाश, न किसी को आई बदबू और न ही पड़ोसियों को कुछ पता चला, अब मिला कंकाल

 

बेंगलुरु से चौंका देने वाली खबर सामने आई है. यहां के हावनूर लेआउट स्थित एक घर से शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को 57 वर्षीय महिला का कंकाल बरामद हुआ. पुलिस को संदेह है कि महिला की मौत लगभग एक साल पहले हो चुकी थी और लंबे समय तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.

मृतका की पहचान नागसंद्रा के पास हावनूर लेआउट निवासी दाक्षायणी के रूप में हुई है. उनके छोटे भाई महेश बसप्पा गोरवनकोल्ला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु (UDR) का मामला दर्ज किया है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ‘द हिंदू’ को बताया कि करीब एक साल तक पड़ोसियों को न तो किसी दुर्गंध का अहसास हुआ और न ही महिला की अनुपस्थिति पर कोई संदेह हुआ जिसके कारण यह घटना इतने लंबे समय तक दबी रही.

अधिकारी ने कहा, “मृतका ज्यादा घुलती-मिलती नहीं थीं और जब भी कोई उनके पास जाता तो वह नाराज हो जाती थीं. इसके अलावा, वह अक्सर घर में ताला लगाकर महीनों के लिए बाहर चली जाती थीं. इसलिए पड़ोसियों को लगा कि इस बार भी वह कहीं बाहर गई होंगी.”

हालांकि, 7 अगस्त को घर के पास खड़े एक पड़ोसी को अचानक तेज बदबू आई जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन पर सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने जब दरवाजा खोला तो अंदर दाक्षायणी का कंकाल पड़ा था.

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

शिकायतकर्ता के अनुसार, दाक्षायणी पिछले कई सालों से सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं. उन्होंने बताया कि 2005 में उनके बेटे के निधन के बाद से ही उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी थी. वर्ष 2010 में शिवमोग्गा के एक अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने उनमें सिज़ोफ्रेनिया की पुष्टि की थी जिसके बाद उन्हें करीब चार महीने तक पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centre) में भर्ती रखा गया था.

इसके बाद परिवार के लोग ही उनकी देखभाल कर रहे थे. हालांकि, 2017 में उनकी देखभाल करने वाले पारिवारिक सदस्य के निधन के बाद दाक्षायणी ने हावनूर लेआउट स्थित अपने घर में अकेले रहने का फैसला किया.

पुलिस के मुताबिक, उनकी बेटी और दामाद अक्सर उनसे मिलने आते थे लेकिन दाक्षायणी को डर था कि वे उन्हें दोबारा किसी पुनर्वास केंद्र में न भेज दें. इसी डर के चलते उन्होंने अपनी बेटी से भी दूरी बना ली थी और उनकी बेटी ने भी लंबे समय से उनसे मुलाकात नहीं की थी.

7 अगस्त की रात पुलिस ने उनके भाई महेश से संपर्क कर जानकारी दी कि उनकी बहन के घर के भीतर एक कंकाल मिला है. बाद में हुई फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि वे अवशेष दाक्षायणी के ही थे.

महेश ने पुलिस को बताया कि उन्हें अपनी बहन की मौत के सिलसिले में किसी पर कोई संदेह नहीं है और उन्होंने परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार किए जाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है. पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और मौत के सही कारणों तथा सटीक समय का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है.

 


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