सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को लेकर सुनाया अहम फैसला
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नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 को असंवैधानिक और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला करार दिया गया था.
मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहकर गलती की है कि मदरसा शिक्षा अधिनियम, 2004 को बुनियादी ढांचे के उल्लंघन के कारण रद्द किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा एक्ट को सही बताया है.
इससे पहले अप्रैल में, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मदरसा अधिनियम के प्रावधानों की गलत व्याख्या की है और उसका दृष्टिकोण प्रथम दृष्टया सही नहीं है.
मदरसा अधिनियम, 2004 की वैधता को चुनौती देने वाले एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर फैसला सुनाते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने 22 मार्च के आदेश में कहा था कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों, भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-ए और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 22 का उल्लंघन करता है.
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मदरसा छात्रों को नियमित स्कूलों में समायोजित करने के लिए कदम उठाने के लिए भी कहा था.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि आवश्यक हो तो नए स्कूल स्थापित किए जाए ताकि 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश से वंचित न रहना पड़े.
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