भारत-बांग्लादेश तनाव पर रूस की प्रतिक्रिया, कही यह बात…..

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

The Hindi Post

भारत और बांग्लादेश तनाव पर रूस की प्रतिक्रिया, कही यह बात…..

 

 

नई दिल्ली | बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंध भी ताक पर हैं. बीते कुछ समय में बांग्लादेश में भारत के दूतावास को निशाना बनाने और भारत विरोधी नारे देने की कई घटनाएं सामने आई है. इसके साथ ही लगातार अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा को लेकर भी भारत में काफी नाराजगी है. इस बीच बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर ग्रिगोरीविच खोजिन ने दोनों देशों के बीच तनाव खत्म करने की अपील की है.

बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर ग्रिगोरीविच खोजिन ने सोमवार को बांग्लादेश से तनाव कम करने की अपील की ताकि अगले साल 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले अच्छा माहौल बन सके. इसके साथ ही उन्होंने भारत के साथ तनाव कम करने की अहमियत पर भी जोर दिया. बांग्लादेश में रूसी राजदूत ने कहा कि यह जितनी जल्दी हो उतना अच्छा है.

उन्होंने कहा कि वे दो देशों के आपसी रिश्तों में दखल नहीं दे रहे हैं लेकिन उन्हें लगता है कि ऐसा कोई रास्ता निकालना समझदारी होगी जिससे तनाव मौजूदा स्तर से आगे न बढ़े. रिश्ते आपसी भरोसे और विश्वास पर आधारित होने चाहिए.

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव को लेकर उन्होंने उम्मीद जताई है कि वोटिंग समय पर होगी. चुनाव पर्यवेक्षकों को भेजने के बारे में राजदूत ने कहा कि वह चुनाव आयोग के संपर्क में हैं और वह आयोग से आधिकारिक निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं.

बांग्लादेश में हालातों को लेकर पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने कहा, “बांग्लादेश में हालात बहुत तनावपूर्ण हैं खासकर राजधानी ढाका और हमारे दूसरे शहर चटगांव में क्योंकि इसे सत्ताधारी सरकार का संरक्षण मिल रहा है. वे कुछ चरमपंथी पार्टियों और संगठनों को रोजाना बाहर आने और अराजकता फैलाने में मदद कर रहे हैं या उकसा रहे हैं. इसलिए हालात काफी अस्थिर बने हुए हैं क्योंकि चुनाव नजदीक आ रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि वे चुनाव टालना चाहते हैं और अपनी सत्ता बनाए रखना चाहते हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए वे अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं. उनके पास कुछ यूट्यूबर और ऐसे लोग हैं जो ऑनलाइन मंच पर आकर भड़काते हैं, जिन्हें लगातार लोगों को उकसाने के लिए कहा जा रहा है. इसके अलावा, उनके पास हिज्ब उत-तहरीर और जमात-ए-इस्लामी छात्र संगठन शिबिर जैसी कुछ चरमपंथी राजनीतिक पार्टियां भी हैं. इसलिए वे देश में सामाजिक अस्थिरता पैदा करने के लिए लगातार इन संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बीते कुछ दिनों में वहां पर जो भारत विरोधी गतिविधियां देखने को मिली हैं, इसे लेकर मोहिबुल हसन चौधरी ने कहा, “भारत विरोधी प्रदर्शन सिर्फ ढाका और चटगांव के कुछ हिस्सों तक ही सीमित हैं. ऐसा नहीं है कि पूरे देश में भारत विरोधी भावना है. अलग-अलग संस्थानों के कुछ उग्र, चरमपंथी, कट्टरपंथी छात्रों में कुछ ने, कई मदरसा छात्रों को अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर किया है. इनमें कौमी मदरसे और खुद ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र तक शामिल हैं. जो मदरसा छात्र कैंपस के अंदर रहते हैं, वे खाने और रहने के लिए मदरसों पर निर्भर होते हैं. अगर उन्हें इन जुलूसों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उनके पास कोई चारा नहीं होता. ऐसा नहीं करने पर वे अपनी एकमात्र पनाहगाह, खाना और रहने की जगह खो देंगे.”

आईएएनएस

 


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