नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामला: हाईकोर्ट ने आसाराम को दी यह सजा

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नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामला: हाईकोर्ट ने आसाराम को दी यह सजा

 

जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया. नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा है. कोर्ट ने दोषसिद्धि की पुष्टि करते हुए इस मामले के सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को बरी कर दिया है. आसाराम, जो वर्तमान में अंतरिम चिकित्सा जमानत (मेडिकल बेल) पर बाहर है, उसे अब आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा.

यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया.

जोधपुर स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के आरोपों के बाद अगस्त 2013 में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था. एक लंबी सुनवाई के बाद, जोधपुर की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने इस सजा के खिलाफ दायर अपील पर 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई की थी. दलीलें पूरी होने के बाद खंडपीठ ने 20 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज 27 मई को सुनाया गया.

बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान आसाराम के वकीलों ने इस मामले को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया था और पीड़िता के माता-पिता के बयानों में कथित विसंगतियों की ओर इशारा किया था. बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि घटना की रात आसाराम और पीड़िता के बीच बातचीत का कोई कॉल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. उन्होंने समानता के सिद्धांत (प्रिंसिपल ऑफ पैरिटी) का हवाला देते हुए कहा था कि चूंकि इसी सबूत के आधार पर कुछ सह-आरोपियों को बरी किया जा चुका है, इसलिए आसाराम को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

दूसरी तरफ, इस अपील का विरोध करते हुए सरकारी वकील और पीड़िता के वकील पी.सी. सोलंकी ने दलील दी थी कि पॉक्सो एक्ट के तहत केवल पीड़िता का बयान ही दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त सबूत माना जा सकता है और इस सिद्धांत को सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार सही ठहराया है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गवाहों पर हुए हमलों और उनकी हत्याओं से साफ है कि सबूतों को नष्ट करने और मामले को प्रभावित करने की कोशिशें की गई थीं.

गुजरात मामले में भी काट रहा है उम्रकैद

86 वर्षीय आसाराम गुजरात के गांधीनगर स्थित अपने आश्रम में एक महिला अनुयायी (साध्वी) के यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहा है. उस मामले में उसे जनवरी 2023 में दोषी ठहराया गया था. आसाराम ने अपनी ढलती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बार-बार जमानत की गुहार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, हाईकोर्ट ने उसे अंतरिम चिकित्सा जमानत दी थी जिसे कई मौकों पर बढ़ाया गया था. हालांकि, हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब उसे दोबारा जेल जाना होगा और अधिकारियों के सामने सरेंडर करना होगा.

 

नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने बरकरार रखी आसाराम की उम्रकैद की सजा, अब करना होगा सरेंडर

 


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