“कॉम्प्रोमाइज्ड PM को भागते देख……”, प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नंबर 1 नॉर्वे की पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला
“कॉम्प्रोमाइज्ड PM को भागते देख……”, प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नंबर 1 नॉर्वे की पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नॉर्वे दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है. दरअसल, एक संयुक्त प्रेस वार्ता के बाद नॉर्वे की महिला पत्रकार हेली लिंग के सवाल का जवाब दिए बिना पीएम मोदी आगे बढ़ गए थे. इस घटना पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जब दुनिया एक कॉम्प्रोमाइज्ड PM को कुछ सवालों से घबराकर भागते हुए देखती है, तो भारत की छवि पर क्या असर पड़ता है. जब छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो डरने की भी कोई बात नहीं है.”
When there is nothing to hide, there is nothing to fear.
What happens to India’s image when the world sees a compromised PM panic and run from a few questions? https://t.co/tOO8vzESpf
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 18, 2026
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पीएम मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ एक जॉइंट प्रेस मीट की लेकिन मीडिया के सवालों का सामना नहीं किया. जब पीएम मोदी वहां से जाने लगे तो पत्रकार हेली लिंग ने सीधे उनसे पूछा, “पीएम मोदी, आप दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के कुछ सवालों के जवाब क्यों नहीं देते?”
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का हवाला देकर पत्रकार ने घेरा
पीएम मोदी से कोई जवाब न मिलने पर हेली लिंग ने सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो शेयर किया. उन्होंने लिखा कि नॉर्वे ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ में पहले पायदान पर है, जबकि भारत इस सूची में 157वें स्थान पर खिसक चुका है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत इस मामले में फिलीस्तीन, यूएई और क्यूबा जैसे देशों की कतार में खड़ा है.
Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to.
Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba.
It is our job to question the powers we cooperate… pic.twitter.com/vZHYZnAvev
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पत्रकार को दिया आमंत्रण
इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय हरकत में आ गया. भारतीय विदेश मंत्रालय ने 18 मई को हेली लिंग की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय दूतावास आज रात प्रधानमंत्री के दौरे पर एक प्रेस ब्रीफिंग कर रहा है. आप वहां आकर अपने सवाल पूछ सकती हैं.
ब्रीफिंग में तीखी बहस: “हम भारत पर भरोसा क्यों करें?”
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान हेली लिंग ने भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए पूछा, “हम भारत पर भरोसा क्यों करें? क्या भारत में जो हो रहा है, उसे रोका जाएगा? क्या प्रधानमंत्री कभी भारतीय प्रेस के कठिन सवालों के जवाब देंगे?”
हेली के इन तीखे सवालों पर विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज काफी नाराज नजर आए. उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “पहले यह समझना जरूरी है कि भारत क्या है. भारत 5 हजार साल पुरानी एक निरंतर चलती आ रही सभ्यता है और हमने दुनिया को बहुत कुछ दिया है.” जब हेली ने बीच में बोलना चाहा, तो सिबी जॉर्ज ने उन्हें टोकते हुए कहा, “कृपया मुझे बीच में मत रोकिए. आपने पूछा है कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे, तो मुझे जवाब पूरा करने दीजिए.”
कोविड वैक्सीन और अंतरराष्ट्रीय भूमिका का दिया हवाला
सिबी जॉर्ज ने आगे कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने दुनिया के तमाम देशों की मदद की और उन तक वैक्सीन पहुंचाई, यही वैश्विक भरोसे की सबसे बड़ी वजह है. इसके अलावा भारत ने जी-20 (G20) और एआई (AI) समिट जैसे बड़े मंचों पर दुनिया की समस्याओं को जिम्मेदारी से उठाया है. उन्होंने साफ लहजे में कहा, “हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा जरूर हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं.”
जब पत्रकार ने सीधे जवाब की मांग की, तो सिबी जॉर्ज ने दृढ़ता से कहा, “यह मेरा अधिकार है कि मैं कैसे जवाब दूं. आप सवाल पूछ सकती हैं, लेकिन मुझे यह मत बताइए कि जवाब कैसे देना है.” वहीं, पीएम मोदी के सीधे सवाल न लेने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राजनयिक दौरे के दौरान मीडिया को ब्रीफ करना और जानकारी देना हमारी जिम्मेदारी है, जिसे हम बखूबी निभा रहे हैं.
पत्रकार बोलीं- सीधे जवाब के बजाय योग और कोविड की बातें की गईं
इस पूरी बहस के बाद पत्रकार हेली लिंग ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने लिखा कि उन्होंने और उनके सहयोगी ने मानवाधिकारों और भारत की विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर सवाल उठाए थे, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने उनके सीधे जवाब नहीं दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सीधे जवाब देने के बजाय कोविड वैक्सीन, योग और भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों की बातें करके मुख्य मुद्दे को टाल दिया.
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