रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति को क्यों किया फोन, कही यह बात…..

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फाइल फोटो / (क्रेडिट : आईएएनएस)

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रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति को क्यों किया फोन, कही यह बात…..

 

नई दिल्ली | मध्य पूर्व एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की. इस बातचीत के दौरान पुतिन ने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, उनके परिवार और सैन्य अधिकारियों की मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त की.

रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुतिन ने अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए आम नागरिकों के प्रति भी दुख जताया और इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र (मध्य पूर्व) में किसी भी विवाद का हल सैन्य शक्ति के बजाय केवल कूटनीतिक और राजनीतिक माध्यमों से ही निकाला जाना चाहिए. पुतिन ने स्पष्ट किया कि वह गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सदस्य देशों के साथ भी निरंतर संपर्क में हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके.

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस कठिन समय में रूस द्वारा दिखाई गई एकजुटता के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने पुतिन को ईरानी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी. दोनों नेता इस बात पर सहमत थे कि युद्ध की बदलती परिस्थितियों के बीच ईरान और रूस विभिन्न स्तरों पर संवाद बनाए रखेंगे.

इसी कड़ी में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से भी चर्चा की. ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका-इजरायल के “अकारण हमलों” के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाने की मांग की.

इस युद्ध के बीच ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति का मुद्दा भी गरमाया हुआ है. इसने भारत जैसे बड़े आयातकों के लिए चिंता बढ़ा दी है. भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि तेल आपूर्ति के स्रोतों का चयन करना पूरी तरह से भारत का संप्रभु निर्णय है और रूस हमेशा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार रहा है.

अलीपोव ने युद्ध की अनिश्चितता के लिए परोक्ष रूप से अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की अटकलों के बीच रूस का यह रुख संकेत देता है कि वह इस संकट में ईरान के साथ खड़ा है. साथ ही वह वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता को लेकर भी गंभीर है.

 

आईएएनएस/हिंदी पोस्ट डॉट इन

 

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