दर्श अमावस्या पर पितरों को करें प्रसन्न, घर में आएगी सुख-शांति और खुशहाली

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फोटो: आईएएनएस

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नई दिल्ली | पौष माह के कृष्ण पक्ष पर दर्श अमावस्या शुक्रवार को पड़ रही है. इस दिन सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा रात 10 बजकर 51 मिनट तक वृश्चिक राशि में रहेंगे. इसके बाद धनु राशि में विराजमान रहेंगे.

द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 11 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा.

हर माह की अमावस्या को ‘दर्श अमावस्या’ के रूप में मनाया जाता है. ‘दर्श’ शब्द का अर्थ है ‘देखना’ या फिर ‘दर्शन करना,’ और ‘अमावस्या’ उस दिन को कहते हैं, जब चंद्रमा आसमान में अदृश्य होता है.

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि अमावस्या के दिन पितर धरती पर आते हैं. यह दिन पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन दान और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और साथ ही पितृ दोष भी कम होने लगते हैं.

इस तिथि पर सुबह पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और यदि कोई नदी में स्नान नहीं कर सकता है तो वह घर पर ही बाल्टी में नदी का जल मिला ले. नहाते समय अपने पितरों का ध्यान करें. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. इसके साथ ही साबुत उड़द और कंबल का दान करना भी शुभ होता है. इससे पितृ अपने स्थान पर सुखी और प्रसन्न रहते हैं और राहु और केतू का नकारात्मक प्रभाव भी कम होता है.

अमावस्या के दिन पक्षियों को दाना खिलाना बहुत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्षियों के रूप में आकर दाना ग्रहण करते हैं. ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है. पितृ की कृपा से घर-परिवार सुखी रहता है, करियर में सफलता मिलती है और वंश वृद्धि भी होती है.

हमारे ग्रंथों में कुछ उपाय भी बताए गए हैं जिनमें इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना और पीपल के वृक्ष पर कच्चा दूध और काला तिल चढ़ाना शामिल हैं. इससे पितृ दोष शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

IANS


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