एक पायलट को बचाने के लिए भेजे 155 मिलिट्री विमान, डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कैसे अमेरिकी फौज ने बचाया ईरान में फंसे अपने पायलट को
फोटो: आईएएनएस
एक पायलट को बचाने के लिए भेजे 155 मिलिट्री विमान, डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कैसे अमेरिकी फौज ने बचाया ईरान में फंसे अपने पायलट को
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बताया कि उनके देश की फौज ने आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे बड़े कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए ईरान में फंसे दो सैनिकों को बचा लिया. उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में दुश्मन के इलाके में गिराए गए किसी विमान के पायलट को बचाने के लिए इतने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाना बेहद कठिन होता है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में सैनिकों (जो बचाने जाते है) की जान खतरे में पड़ सकती है. यही वजह है कि कई बार ऐसे मिशनों से बचा जाता है लेकिन इस मामले में अमेरिकी सेना ने असाधारण साहस, कौशल और रणनीतिक योजना का प्रदर्शन करते हुए इसे सफल बनाया.
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, यह घटना उस समय (गुरुवार रात) की है जब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के अंदर दुश्मन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सेना को स्पष्ट आदेश दिया कि अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाए, चाहे जोखिम कितना भी बड़ा क्यों न हो. इसके बाद अमेरिकी सेना ने बेहद तेजी से प्रतिक्रिया दी और कुछ ही घंटों के भीतर 21 सैन्य विमानों को दुश्मन के हवाई क्षेत्र में भेज दिया. इस दौरान कई विमान बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे थे और उन पर लगातार गोलीबारी हो रही थी, फिर भी अभियान करीब सात घंटे तक निर्बाध रूप से जारी रहा.
इस ऑपरेशन के पहले चरण में रेस्क्यू टीम ने दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलट को खोज निकाला और HH-60 जॉली ग्रीन हेलिकॉप्टर की मदद से उसे सुरक्षित बाहर (ईरान से) निकाल लिया. हालांकि, दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम्स ऑफिसर था, काफी दूर जाकर गिरा था और गंभीर रूप से घायल हो गया था. वह एक खतरनाक पहाड़ी इलाके में फंसा हुआ था, जहां दुश्मन बलों, स्थानीय सशस्त्र समूहों और अन्य खतरों का लगातार जोखिम बना हुआ था. इसके बावजूद उसने अपनी ट्रेनिंग और सूझबूझ का परिचय देते हुए खुद को बचाने की कोशिश जारी रखी. उसने अपने पास मौजूद लोकेशन ट्रांसमीटर की मदद से अमेरिकी सेना के साथ संपर्क बनाए रखा और अपनी स्थिति की जानकारी देता रहा. लगभग 48 घंटे तक वह दुश्मन क्षेत्र में छिपा रहा और अंततः उसे भी सुरक्षित निकाल लिया गया.
दूसरे चरण के रेस्क्यू ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. इस अभियान में कुल 155 एयरक्राफ्ट शामिल किए गए, जिनमें बॉम्बर, फाइटर जेट, रिफ्यूलिंग टैंकर और विशेष रेस्क्यू विमान शामिल थे. दुश्मन को भ्रमित करने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई गई, जिसमें कई स्थानों पर अलग-अलग गतिविधियां दिखाकर असली ऑपरेशन की लोकेशन को छिपाया गया. इस रणनीति के कारण दुश्मन भ्रमित हो गया और अमेरिकी सेना को सटीक स्थान पर कार्रवाई करने का अवसर मिल गया.
ऑपरेशन के दौरान कुछ भारी विमानों को वापस लाना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें वहीं नष्ट कर दिया गया, ताकि अमेरिकी तकनीक दुश्मन के हाथ न लग सके. इसके बाद हल्के और तेज विमानों की मदद से सभी सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. ट्रंप ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई बेहद कठिन परिस्थितियों में की गई, जहां रनवे के बजाय खेत जैसी जगह से विमानों को उड़ान भरनी पड़ी, लेकिन पहले से तैयार बैकअप योजनाओं के कारण मिशन सफल रहा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान में शामिल सैनिकों, सैन्य अधिकारियों और खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि दुश्मन के इलाके में फंसे सैनिक को ढूंढना ‘भूसे के ढेर में सुई खोजने’ जैसा था, लेकिन समन्वित प्रयासों से इसे संभव बनाया गया. उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिकी सेना का मूल सिद्धांत है—अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ना. यह मिशन इसी सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है और आने वाले समय में इसे सैन्य इतिहास में एक प्रेरणादायक और उल्लेखनीय ऑपरेशन के रूप में याद किया जाएगा.
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