राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान पर हमले रोकने की घोषणा के बाद बाजारों ने दी प्रतिक्रिया, तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा ?

Donald Trump 01 March IANS (1) (1)

फोटो: आईएएनएस

The Hindi Post

राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान पर हमले रोकने की घोषणा के बाद बाजारों ने दी प्रतिक्रिया, तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा ?

 

वॉशिंगटन | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर हमले टालने के फैसले के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई है. साथ ही बाजारों में तेजी देखी गई है. भारत की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है क्योंकि इसका आर्थिक असर पड़ सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ईरान के साथ पिछले दो दिनों में बेहद सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है जिसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में जारी टकराव का पूर्ण समाधान निकालना है. दोनों देशों के बीच इन गहन और विस्तृत चर्चाओं के सकारात्मक रुख को देखते हुए, जो पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, मैंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए.”

उन्होंने यह भी कहा कि हमले रोकने का फैसला ईरान के साथ आगे की वार्ताओं की सफलता पर निर्भर करेगा. यह घोषणा ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर तेहरान 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोलता है तो उसके पावर प्लांट्स को और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया जाएगा.

राष्ट्रपति ट्रंप की आज की घोषणा के बाद बाजारों ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स लगभग दो प्रतिशत तक बढ़ गए जिससे पहले की गिरावट की भरपाई हो गई. वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 100 डॉलर से नीचे आ गई है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यूरोपीय बाजार भी शुरुआती गिरावट के बाद सकारात्मक हो गए, जबकि क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी आई क्योंकि निवेशकों का भरोसा पहले से बेहतर हुआ.

विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने में मदद कर सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है.

हालांकि, अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है. ईरान से जुड़े मीडिया ने ट्रंप की घोषणा को पीछे हटना बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस बयान से पहले कोई सीधी या मध्यस्थता वाली बातचीत नहीं हुई थी.

इस संघर्ष का असर पहले ही वैश्विक ऊर्जा ढांचे पर पड़ चुका है. ईरानी मिसाइल हमलों में कतर के एक बड़े गैस-टू-लिक्विड्स प्लांट को नुकसान पहुंचा है जिससे उसका एक हिस्सा कम से कम एक साल के लिए बंद हो गया है.

बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है. अमेरिका में डीजल की कीमतें एक महीने में 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई हैं. इससे सप्लाई चेन और उपभोक्ता कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.

सोमवार को तेजी के बावजूद निवेशक सतर्क बने हुए हैं. इस संघर्ष ने बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है और बढ़ती महंगाई के जोखिम के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें भी तेज हो गई हैं.

भारत के लिए तेल की कीमतों में गिरावट तुरंत राहत लेकर आई है. दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक होने के कारण भारत कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है. कम तेल की कीमतें महंगाई को कम कर सकती हैं और सरकार के वित्तीय दबाव को घटा सकती हैं.

साथ ही, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है. लाखों भारतीय वहां काम करते हैं और किसी भी तरह की बढ़ोतरी उनके रोजगार और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रेमिटेंस पर असर डाल सकती है.

 

 


The Hindi Post
error: Content is protected !!