कोविड अस्पताल से बुजुर्ग के लापता होने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, कहा- “क्या वह हवा में गायब हुये?”

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो (आईएएनएस)

The Hindi Post

नयी दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के कोविड अस्पताल से एक 82 साल के बुजुर्ग के कथित रूप से लापता होने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगते हुए शुक्रवार को कहा कि क्या वह बुजुर्ग हवा में गायब में हो गये? चीफ जस्टिस एन वी रमना की अगुवाई वाली, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के पैरवीकार अतिरिक्त एडवोकेट जनरल (एएजी) से पूछा कि जब बुजुर्ग व्यक्ति का ऑक्सीजन स्तर कम था और वह चलने-फिरने में असमर्थ थे तो वह गायब कैसे हो गये?

खंडपीठ ने कहा कि बुजुर्ग को लापता हुये एक साल हो गया। उस परिवार की हालत का अंदाजा लगाइये। परिवार की तकलीफों को देखिये।

अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने लापता बुजुर्ग को तलाशन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। उन्हें तलाशने में सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन अभी तक उनका पता नहीं चल पाया है।

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इस पर खंडपीठ ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने उनके शव की तलाश की तो एएजी ने कहा कि प्रयागराज के सभी श्मशानों में प्रशासन ने तलाश की है।

इस पर जस्टिस कृष्ण मुरारी ने टिप्पणी कि “तो इसका मतलब वह हवा में गायब हो गये?”

एएजी ने कहा कि यह घटना कोरोना की दूसरी लहर के दौरान की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुजुर्ग के शव को हाजिर करने को कहा था लेकिन लापता होने की स्थिति में ऐसा कर पाना संभव नहीं है।

एएजी ने खंडपीठ को बताया कि प्रशासन ने लापता बुजुर्ग के रंगीन पोस्टर भी लगवाये और उनके लापता होने के बारे में रेडियो और टीवी पर सूचना भी चलवाई। उन्होंने बताया कि इस मामले में हाइकोर्ट ने मुख्य सचिव सहित आठ अधिकारियों को समन भेजा था।

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खंडपीठ ने पूछा कि राज्य सरकार इस बुजुर्ग व्यक्ति के परिवार को कितना मुआवजा देगी, तो एएजी ने कहा कि यह निर्णय शीर्ष अदालत करेगी। एएजी ने तर्क दिया कि बुजुर्ग 82 साल के थे। वह कौशाम्बी में जूनियर इंजीनियर के पद पर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि लापता बुजुर्ग के बेटे ने अस्पताल प्रशासन से अपने पिता को अस्पताल से छोड़े जाने की गुहार लगाते हुये इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

इस पर हाईकोर्ट ने अप्रैल में राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह बुजुर्ग को छह मई को कोर्ट में पेश करे और ऐसा न करने पर राज्य सरकार के अधिकारी खुद ही अदालत में उपस्थित रहें।

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इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुये हाई कोर्ट में इसके आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह कानूनी खर्चे को कवर करने के रूप में 50 हजार रुपये की शुरूआती रकम दे इस परिवार को दे।

आईएएनएस

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