अजीबोगरीब : प्याज-लहसुन को लेकर दंपत्ति में मची ऐसी कलह कि 12 साल मुकदमेबाजी के बाद टूट गया 23 साल पुराना रिश्ता

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

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अजीबोगरीब : प्याज-लहसुन को लेकर दंपत्ति में मची ऐसी कलह कि 12 साल मुकदमेबाजी के बाद टूट गया 23 साल पुराना रिश्ता

 

अहमदाबाद में एक विवाहित जोड़े का वर्षों पुराना विवाद आखिरकार अदालत में समाप्त हो गया. दंपति के बीच प्याज और लहसुन खाने-न खाने को लेकर पैदा हुआ मतभेद इतना गहरा हो गया कि मामला तलाक तक पहुंच गया. अब गुजरात हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें उसने पारिवारिक अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को चुनौती दी थी.

यह विवाह वर्ष 2002 में हुआ था. महिला जो स्वामीनारायण संप्रदाय की अनुयायी है, अपने धर्माचार के चलते प्याज और लहसुन का सेवन बिल्कुल नहीं करती थी. वहीं पति और सास ऐसे किसी धार्मिक नियम का पालन नहीं करते थे. धीरे-धीरे भोजन से जुड़ी यह असहमति रोजमर्रा की तकरार में बदल गई. दो अलग-अलग तरह का भोजन बनाने की व्यवस्था भी स्थिति सुधार नहीं पाई. अंततः पत्नी अपने बच्चे के साथ मायके चली गई.

साल 2013 में पति ने अहमदाबाद की फैमिली कोर्ट में पत्नी पर क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाते हुए तलाक का मुकदमा दायर किया था. लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने 8 मई 2024 को विवाह समाप्त करने का आदेश दिया और पति को पत्नी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया.

फैसले के बाद दोनों पक्ष हाई कोर्ट पहुंचे — पति भरण-पोषण राशि पर आपत्ति जताते हुए और पत्नी तलाक के आदेश को चुनौती देते हुए. पत्नी की ओर से तर्क दिया गया कि उसका भोजन संबंधी पालन-आचार विवाद का आधार नहीं होना चाहिए. वहीं पति ने कहा कि वह और उसकी मां, पत्नी के लिए बिना प्याज-लहसुन का खाना अलग से बनाते थे लेकिन उसकी “कठोरता” के कारण विवाद बढ़ता गया.

सुनवाई के दौरान पत्नी ने अदालत को बताया कि अब उसे विवाह समाप्त होने पर कोई आपत्ति नहीं है. इसके बाद न्यायमूर्ति संगीता विषेन और न्यायमूर्ति निशा ठाकोर की खंडपीठ ने तलाक के आदेश को बरकरार रखा. पति ने बकाया भरण-पोषण राशि किस्तों में जमा करने पर सहमति जताई.

 

हिंदी पोस्ट वेब डेस्क

 


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