अली खामानेई की मौत के बाद इनको बनाया गया ईरान का अंतरिम सर्वोच्च नेता, जानिए इनके बारे में….

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

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अली खामानेई की मौत के बाद इनको बनाया गया ईरान का अंतरिम सर्वोच्च नेता, जानिए इनके बारे में….

 

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के अगले दिन अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. 67 साल के आराफी अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

अयातुल्ला आराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाए गए हैं / (फोटो क्रेडिट : आईएएनएस)

आराफी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं, जो सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करती है. वे गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं और फिलहाल ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं. अब स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करेगी.

खामनेई के मारे जाने पर ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई है. ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक मना रहा है.’

इधर ईरानी सेना ने कहा कि वह सबसे खतरनाक अभियान की शुरुआत करने जा रही है. हमला कुछ देर में शुरू होगा और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा.

इजराइल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया. हमलों से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं. ईरान ने भी देशों पर जवाबी हमले किए थे.

अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था. वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे.

1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया. धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे.

1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई. खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई. खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया.

1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ. उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई. इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने.

1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया. इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया. समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं.


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