सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन फिर बोले – “अब आप कहेंगे कि धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफे का क्या हुआ…”, आ गया जवाब

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फोटो: आईएएनएस

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सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन फिर बोले – “अब आप कहेंगे कि धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफे का क्या हुआ…”, आ गया जवाब

 

शुक्रवार को अनशन समाप्त करते हुए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर केस न चलाने और नीट पेपर लीक से प्रभावित पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग मान ली है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार से अभी कोई तत्काल आश्वासन नहीं मिला है.

वांगचुक ने कहा, “26वें दिन में आप लोगों को खास खबर बताना चाहूंगा. अभी रात के लगभग 12.30 बज रहे हैं. अभी थोड़ी देर पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा साहब और जितेंद्र सिंह साहब यहां आए थे और लद्दाख के एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेतागण भी यहां आए थे और उससे पहले आप लोगों को मालूम है विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने आकर ओर हस्ताक्षर देकर हमसे अनशन तोड़ने के लिए कहा और वह संसद में इस मुद्दे पर नीट पेपर्स और परीक्षाओं की प्रणाली पर चर्चा करेंगे. यह आश्वासन दिया और जो सरकार से इस तरफ से मंत्रीगण आए थे उन्होंने भी यह आश्वासन दिया.”

सोनम वांगचुक की मांग
उन्होंने कहा, “जिसका कि दो दिन से हम बहुत बातचीत कर रहे थे कि मुझे आश्वासन चाहिए और लिखित में चाहिए और इसमें दो दिन लगे और मुझे इसलिए अनशन पर दो दिन और बैठना करना पड़ा और ज्यादा भी बैठ जाता तो. आखिर में आज उन्होंने लिखकर आश्वासन दिया है.”

उन्होंने बताया है कि सरकार दिल्ली में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर केस दर्ज नहीं करने के लिए तैयार है. साथ ही उन लोगों पर केस नहीं होगा जो 20 जुलाई को मार्च में शामिल हुए थे. साथ ही सरकार ने संसद में पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर चर्चा का आश्वासन पहले ही दे दिया है. इसके अलावा सरकार हाल ही में हुए नीट पेपर लीक में सुसाइड करने वालों के परिवार को उचित मुआवजा देने पर भी विचार कर रही है.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं?

वांगचुक ने कहा, “अब आप कहेंगे जरूर कि धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफे पर क्या हुआ? पहली बात तो इस बात पे वो अभी मुझे कोई आश्वासन नहीं दे पा रहे थे कि ऐसा कब होगा और संसद के फर्श पर तो इस पर चर्चा होगी ही. अब मेरे सामने दो रास्ते थे या तो में और अनशन पर बैठूं हफ्तों और शायद उसी में खत्म हो जाऊं. फिर आप ही लोगों में से हजारों लोगों ने मुझे आज से दो-तीन हफ्ते पहले से कहते आए हैं कि आपकी जान जरूरी है. आपको संघर्ष आगे रखना है. जिंदा रहना जरूरी है.”

सरकार का ही नुकसान, वांगचुक बोले

उन्होंने कहा, “मगर में यह भी नहीं मानता कि हमने यह हासिल नहीं किया है. दोस्तों, मेरा दिमाग अलग तरह से चलता है. अगर वह ऐसा नहीं करते, इस्तीफा नहीं देते तो इससे हानि हमें या बच्चों को नहीं होगा. सरकार को खुद होगा. इस छोटे से मुद्दे को ना टालकर वो खुद अपनी हानि कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “बल्कि दे देते इस्तीफा तो कब से उनका यह सारा नुकसान रुक जाता. इसलिए मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह बात नहीं थी. इसका तो खुद निपटारा हो जाएगा तमाम तरीकों से. ज्यादा जरूरी मेरे लिए था कि हमारे बच्चों पर कोई ऐसे केसेस ना लगे. आपको नहीं पता है.’

लद्दाख का किया जिक्र

वांगचुक ने कहा, “मैंने देखा है लद्दाख में कैसे सालों जीवन भर उन्हें एफआईआर के चक्कर में अपने भविष्य को बिगाड़ना पड़ता है. ऐसा कुछ नहीं होगा. यह हमने उनसे हासिल किया है. इसकी मुझे खुशी है और जो मृत बच्चों के परिवार हैं उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा. इसकी मुझे खुशी है और भारत के लोकतंत्र की सबसे उच्च मंदिर में कहूंगा जो कि हमारी संसद है वहां पर इस मुद्दे पर और जवाबदेही पर भी पूरी बहस होगी. तो इसके साथ मैं आप सबको भी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कि आप लोगों ने समर्थन दिया इस आंदोलन का. जय हिंद.”

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