उत्तराखंड में बड़ा हादसा: जोशीमठ के चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश
सांकेतिक तस्वीर (AI Image - ChatGPT)
उत्तराखंड में बड़ा हादसा: जोशीमठ के चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश
चमोली | उत्तराखंड के चमोली जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है. बद्रीनाथ धाम से लौट रहा एक हेलीकॉप्टर खराब मौसम के बीच क्रैश हो गया है. वहीं, खराब मौसम के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
चमोली प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर वीटी-एचसीएक्स बद्रीनाथ से देहरादून के लिए टेकऑफ किया था. हेलीकॉप्टर ने दोपहर 1:12 बजे बद्रीनाथ से उड़ान भरी थी.
बताया जा रहा है कि बद्रीनाथ धाम और जोशीमठ के बीच यह हेलीकॉप्टर लापता हुआ है. आखिरी बार जोशीमठ के सामने हाथीपहाड़ के पीछे टॉप पर स्थित आर्मी पोस्ट के आसपास इसका संपर्क हुआ था. उसके बाद से हेलीकॉप्टर से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है. मेडिकल टीम मौके पर रवाना हो गई है. हालांकि, हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की बात भी सामने आई.
जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर में 6 लोग सवार थे. खराब मौसम के कारण रेस्क्यू में दिक्कत आ रही है. प्रशासन और आर्मी की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुट गई हैं.
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “चाई गांव, जोशीमठ के निकट हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण सूचना प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. स्वयं भी पूरे घटनाक्रम की निरंतर निगरानी कर रहा हूं. गंभीर रूप से घायलों को तत्काल एयरलिफ्ट कर बेहतर उपचार हेतु हायर सेंटर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. ईश्वर से यात्रियों के सकुशल होने की कामना करता हूं.”
बता दें कि बद्रीनाथ धाम भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिर है. यह देश के चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थस्थल है. इसे ‘भू-वैकुंठ’ यानी धरती पर भगवान विष्णु का स्वर्ग भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी. मौसम के प्रकोप से उनकी रक्षा करने के लिए माता लक्ष्मी ने ‘बद्री’ यानी बेरी के वृक्ष का रूप धारण किया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘बद्रीनाथ’ पड़ा.
यह स्थान भगवान विष्णु के अवतार ऋषि नर और नारायण की तपस्थली भी माना जाता है. यहां भारी बर्फबारी के कारण मंदिर साल में केवल 6 महीने, अप्रैल-मई से नवंबर तक ही श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. सर्दियों में मूर्ति को पास के जोशीमठ लाया जाता है.
IANS
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