महिला के दिमाग में मिला जिंदा 8 सेंटीमीटर लंबा कीड़ा, दुनिया का पहला केस, डॉक्टर भी रह गए हैरान
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ऑस्ट्रेलिया से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां एक 64 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला के दिमाग में जिंदा कीड़ा मिला है. ऐसा बताया जा रहा है कि यह दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है.
ऑस्ट्रेलियाई न्यूरोसर्जनों की एक टीम ने, भूलने की बीमारी और अवसाद की शिकायत लेकर उनके पास आई एक महिला मरीज के मस्तिष्क से आठ सेमी लंबा कीड़ा (परजीवी राउंडवॉर्म) निकाला है. सबसे बड़ी बात यह कि यह रॉउंडवॉर्म जिंदा है. यानि महिला के मस्तिष्क में जिंदा रॉउंडवॉर्म (कीड़ा) था.
2022 में महिला में डिप्रेशन और भूलने की बीमारी के लक्षण देखने को मिले थे. इसके बाद डॉक्टरों ने उनके मस्तिष्क का MRI स्कैन कराया था. इसके बाद सर्जरी करने का फैसला हुआ. सर्जरी करने पर पता चला कि महिला के मस्तिष्क में जिंदा कीड़ा है.
मस्तिष्क की सर्जरी के दौरान, राउंडवॉर्म को जब निकाला गया तो वो जीवित था और हिल रहा था. डॉक्टरों को यह संदेह है कि यह रॉउंडवॉर्म – लार्वा, या किशोर अवस्था में, महिला के फेफड़ों और यकृत (लिवर) सहित अन्य अंगों में भी मौजूद हो सकता है.
एएनयू और कैनबरा अस्पताल के प्रमुख संक्रामक रोग विशेषज्ञ, संजय सेनानायके ने इमर्जिंग संक्रामक रोगों के जर्नल में प्रकाशित एक पेपर में कहा, “यह दुनिया में वर्णित ओफिडास्करिस का पहला ह्यूमन केस है. (यानि पहली बार यह कीड़ा किसी इंसान में पाया गया है)”
बता दे कि इस रॉउंडवॉर्म का मिलना इसलिए अजीब बात है क्योंकि ये आमतौर पर सांपों में पाया जाता है, इंसानों में नहीं. ये विशेष तरह का राउंडवॉर्म (कीड़ा) कार्पेट पायथंस (Carpet Pythons) में पाया जाता है, जो कंस्ट्रिक्टर की एक बड़ी प्रजाति है.
अब डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा है कि सांपो में पाया जाने वाला कीड़ा महिला के शरीर में कैसे प्रवेश कर गया.
शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स की रहने वाली महिला के घर के पास एक झील है. इस झील के किनारे वार्रिगल ग्रीन्स (एक प्रकार की देशी घास) उगी है. महिला ने वार्रिगल ग्रीन्स को पका के खाया होगा. इस घास पर कीड़े के अंडे होंगे जिन्हें महिला ने खा लिया होगा. महिला खाने के लिए इस घास को उगाती थी. तो ऐसा हो सकता है कि कीड़े का अंडा उसी में मौजूद रहा हो.
इसको खाने के बाद महिला के पेट में दर्द हुआ. उन्हें दस्त आई. उसके बाद बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो गई.
संक्रामक रोगों और मस्तिष्क विशेषज्ञों की टीम द्वारा मरीज की निगरानी की जा रही है.
हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
(इनपुट्स: आईएएनएस)
