मंच पर रोने लगे यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, वीडियो आया सामने
मंच पर रोने लगे यूपी के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, वीडियो आया सामने
कानपुर | उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक गुरुवार को कवि सम्मेलन के मंच पर अपने जीवन के संघर्षों को याद कर भावुक हो उठे. अपनी साधारण पृष्ठभूमि और अभावों के दिनों का जिक्र करते हुए उनके आंसू छलक आए.
अभावों के वो दिन: गर्मी में चप्पल और जाड़े में जद्दोजहद
अपनी गरीबी के दिनों को याद करते हुए पाठक ने कहा, “चप्पल होता था, जूता नहीं होता था. गर्मी में चप्पल, जाड़े में जूता मिलना मुश्किल होता था. जब एक गरीब व्यक्ति को मैं देखता हूं, सड़क पर वो दुखी है, तो मैं दुखी होता हूं.”
बाबा साहेब में देखा पिता का अक्स
भावुक स्वर में डिप्टी सीएम ने कहा, “बाबा साहेब को जब मैंने सुना तो मुझे लगा कि यह तो पिता समान हैं. मेरे पिताजी नहीं हैं. मैंने उनको अपना पिता माना. आज मैं जिस ओहदे पर खड़ा हूं, मैं इस लायक अपने को समझता ही नहीं हूं.”
जब किसी गरीब को देखता हूँ तो दिल भर आता है।
गरीबी सिर्फ देखी नहीं, जी है।लखनऊ आया था तो सर्दी में पहनने को जूते तक नहीं थे।
इसलिए खुद को डिप्टी सीएम नहीं,
गरीब का सेवक मानता हूँ..मेरठ मे एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हुए डिप्टी सी एम ब्रजेश पाठक pic.twitter.com/ovp1IS2yjn
— MANISH PANDEY (@ManishPandeyLKW) January 22, 2026
अम्मा का स्टोव और लखनऊ की वो रोटियां
उन्होंने अपनी संघर्ष यात्रा के एक व्यक्तिगत हिस्से को साझा करते हुए बताया, “मैंने अपनी दुनिया अपने दम पर बनाई है. जब लखनऊ आया, तो अम्मा ने मिट्टी के तेल वाला एक छोटा सा स्टोव दिया था. मुझे आटा गूंधना (माढ़ना) तक नहीं आता था, कभी पानी ज्यादा हो जाता तो कभी आटा, अकेले रहने के बावजूद कभी-कभी बहुत ज्यादा आटा माढ़ लेता था. उसी स्टोव पर रोटियां सेंकी हैं. इसलिए मैं जानता हूं कि गरीबी क्या होती है और सम्मान की कीमत क्या है.”
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