UP: गल्फ देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी, गैंग का भंडाफोड़, 80 पासपोर्ट बरामद

People cheated in the name of getting jobs in Gulf countries (1) (1)
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नोएडा | थाना सेक्टर 20 पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो भोले-भाले लोगों को गल्फ देशों में नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करता था. यह गैंग फर्जी पासपोर्ट, टिकट, वीजा आदि कागजात तैयार कर लोगों को गल्फ देशों में भेजने की बात कहता था. इसके अवाज में यह गैंग लोगों से पैसे वसूलता था.

गैंग के 2 मास्टर माइन्ड गिरफ्तार किए गए हैं. पुलिस ने इनके कब्जे से 80 पासपोर्ट, 22 फर्जी आधार कार्ड, 1 प्रिंटर, 3 मोबाइल फोन, 1 डेस्कटप, 1 सीपीयू, 1 लैपटॉप, 1 की-बोर्ड व 4 लाख 24 हजार रुपए बरामद किए हैं.

पुलिस ने गैंग का भंडाफोड़ करते हुए मास्टर माइन्ड (1) सुधीर सिंह और (2) हमीद को सेक्टर 27 स्थित श्रीजी पैलेस के प्रथम तल पर संचालित अनाधिकृत कार्यालय से गिरफ्तार किया है.

गौरतलब है की इस मामले में 9 अक्टूबर को अंकुर कुमार सिंह समेत कुल 15 व्यक्तियों द्वारा इराक में नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की कंप्लेंट दर्ज कराई गई थी. उन्होंने कंप्लेंट में बताया था कि उनका फर्जी वीजा व एयर लाइन्स टिकट तैयार किया गया था. इसके बदले में 65 हजार से 1 लाख रुपए तक प्रत्येक व्यक्ति वसूले गए थे.

अपराध करने का तरीका

अभियुक्तगण द्वारा अपनी पहचान छिपा कर एक कार्यालय किराए पर लिया गया था. अम्बा इन्टरप्राइजेस नाम से फर्जी कम्पनी तैयार की गई थी तथा गल्फ कोर्स नाम से फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर गल्फ देशों में (इराक, दुबई, बहरीन) में नौकरी लगवाने का विज्ञापन प्रसारित किया जाता था. इस विज्ञापन को देखकर मध्यम वर्गीय परिवार के लोग, नौकरी के लिए इस अस्थाई कार्यालय में गैंग के सदस्यों से संपर्क करते थे. इसके बाद गैंग द्वारा लोगों को गल्फ देशों में नौकरी लगवाने के नाम पर फर्जी प्रक्रिया समझायी जाती थी. इस प्रक्रिया के तहत यह अपराधीगण आवेदनकर्ताओं से उनका पासपोर्ट ले लेते थे तथा फर्जी वीजा एवं एयर लाइन्स के फर्जी टिकट तैयार करते थे. इसी दौरान पूर्व से निर्धारित योजना के मुताबिक आवेदनकर्ताओं का फर्जी चिकित्सीय परीक्षण भी कराया जाता था. इसी प्रक्रिया के दौरान यह अपराधी आवेदनकर्ताओं से करीब 65 हजार से एक लाख रुपए की धनराशि (प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से) अकाउंट में ट्रांन्सफर एवं नगद रूप में वसूल किया करते थे. जब आवेदनकर्ताओं की संख्या अत्यधिक हो जाती, तो यह सभी अपराधीगण अपना कार्यालय एवं मोबाइल फोन बन्द करके फरार हो जाते थे तथा फिर अपना कार्यालय किसी अन्य जनपद एवं किसी राज्य में खोल कर पुन: धोखाधड़ी का कार्य प्रारंभ कर देते थे.

अपराध के महत्वपूर्ण बिन्दु

1. अभियुक्त सुधीर ग्रेजुएट एवं हमीद इण्टर पास हैं। अभियुक्त सुधीर पूर्व मे दुबई में पल्मबर की नौकरी के लिए गया था। लेकिन कोविड-19 के लॉक डाउन की वजह से इसके बाद इसने कुछ समय हल्दीराम कम्पनी में नौकरी की इसके बाद यह इस धोखाधड़ी के कार्य में संलिप्त हो गया. अभियुक्त सुधीर व हमीद द्वारा गैंग के साथ यह धोखाधड़ी का कार्य पिछले करीब 3 वर्ष से किया जा रहा है। सेक्टर 27 में इनके द्वारा करीब 4 माह से एवं इससे पूर्व दिल्ली व गाजियाबद क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से कार्यालय खोलकर धोखाधड़ी का कार्य कर रहे थे. अभी तक पूछताछ में लगभग 600-700 व्यक्तियों के साथ धोखाधड़ी करना प्रकाश में आया है.

2. अभियुक्त सुधीर व हमीद द्वारा पूर्व में भारत सरकार की रजिस्टर्ड कंपनी आरके इन्टरनेशनल एवं डायनामिक में नौकरी लगवाने के लिए आवेदनकर्ताओं को लेकर जाते थे। जहां ये आवेदनकर्ताओं से कमीशन प्राप्त करते थे। इसी अनुभव को इन अपराधियों द्वारा आवेदनकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी में परिवर्तित कर दिया गया.

3. उपरोक्त गैंग के अपराधियों द्वारा 4 माह पूर्व सेक्टर 27 में खोले गए ऑफिस में अब तक करीब 75-80 व्यक्तियों के साथ विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी कर रुपए हड़प लिए गए.

4. इन अपराधियों ने अपनी फर्जी कम्पनी का नाम अम्बा इन्टरप्राजेज रखा, क्योंकि महाराष्ट्र में अम्बे इन्टरप्राइजेज नाम की उत्कृष्ट ख्याती की रजिस्टर्ड कम्पनी है. रजिस्टर्ड कम्पनी के मिलते जुलते नाम से आवेदनकर्ता भ्रमित होकर धोखाधड़ी के जाल में आसानी से फंस जाएंगे। इन अपराधियों द्वारा अपनी फर्जी कम्पनी का रजिस्ट्रेशन नम्बर भी महाराष्ट्र वाली कम्पनी का ही अंकित किया है.

5. अभियुक्तों द्वारा फर्जी आधार कार्ड आवेदनकर्ताओं को दिखाकर यकीन दिलाते थे कि इतने लोगों को हम नौकरी पर भेज चुके हैं. यह फर्जी आधार कार्ड अपने कार्यालय में तैयार करते थे.

6. धोखाधड़ी के उक्त गैंग द्वारा आवेदनकर्ताओं से रूपया ट्रान्सफर कराने के लिए 12 बैंक अकाउंट का प्रयोग किया जा रहा था. पूछताछ से यह भी प्रकाश में आया है कि इन अपराधियों ने महेन्द्र मुखिया के नाम का बैंक अकाउंटस को धोखाधड़ी की धनराशी लेने में प्रयोग किया हैं. जबकी महेन्द्र मुखिया की मृत्यु हो चुकी है.

7. उक्त अपराधियों द्वारा धोखाधडी कर बैंक अकाउंट्स में जमा कराए गए रूपयों में से 5 माह में 3 अकाउंट से करीब 60 लाख रूपयों का डेबिट किया जा चुका है.

8. गैंग के द्वारा धोखाधड़ी के लिए खोले जाने वाले कार्यालय के भवन स्वामी द्वारा भी इनका पुलिस वैरिफिकेशन नहीं कराया जाता था.

9. अभियुक्त हमीद उर्फ करीम गैंग का मास्टर माइन्ड है यह ऑफिस में मेन चेयर पर बैठकर पुरे ऑफिस का कार्य देखता था. ऑफिस में जो कोई व्यक्ति आता था उससे बात चीत कर अपने जाल में फसा लेता था.

10. अभियुक्त सुधीर के द्वारा ही ऑफिस खोलने के लिए रेंट एग्रीमन्ट तैयार किया जाता था तथा ऑफिस में मौजूद रहकर आने वाले आवेदनकर्ताओं से बातचीत कर उन्हे जाल में फसाने का कार्य किया जाता था.

फरार अभियुक्तों का विवरण

(1) मो. फिरोज

(2) वैद्यनाथ यादव

(3) मुस्तकीम उर्फ समीर

(4) दानिश

(5) कुलदीप

आईएएनएस


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