राहुल बोले- ‘IAS का निजीकरण’ आरक्षण खत्म करने की ‘मोदी की …, अश्विनी वैष्णव ने दिया यह जवाब

Ashwini Vaishnav IANS 2 (1)

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (फाइल फोटो | आईएएनएस)

The Hindi Post

नई दिल्ली | लेटरल एंट्री के माध्यम से प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारियों की सीधी भर्ती को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं के बीच रेलवे तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि इस मामले में कांग्रेस का विरोध पाखंड के अलावा कुछ नहीं है क्योंकि इसकी अवधारणा यूपीए सरकार के समय ही तैयार हुई थी.

केंद्रीय मंत्री ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “लेटरल एंट्री मामले में कांग्रेस का पाखंड स्पष्ट है. लेटरल एंट्री की अवधारणा को यूपीए सरकार ने ही तैयार की थी.”

उन्होंने लिखा कि दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग (एआरसी) 2005 में यूपीए सरकार के दौरान गठित किया गया था जिसके अध्यक्ष वीरप्पा मोइली थे. आयोग ने विशेष ज्ञान की आवश्यकता वाले पदों में रिक्तियों को भरने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती की सिफारिश की थी.

वैष्णव ने कहा, “एनडीए सरकार ने इस सिफारिश को लागू करने के लिए एक पारदर्शी तरीका बनाया है. यूपीएससी के माध्यम से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से भर्ती की जाएगी. इस सुधार से शासन में सुधार होगा.”

Advertisement

दरअसल, अश्विनी वैष्णव कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जवाब दे रहे थे. इससे पहले राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट लिख कर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला था. उन्होंने लिखा था, “नरेंद्र मोदी संघ लोक सेवा आयोग की जगह ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ के ज़रिए लोकसेवकों की भर्ती कर संविधान पर हमला कर रहे हैं. केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर लेटरल एंट्री के ज़रिए भर्ती कर खुलेआम SC, ST और OBC वर्ग का आरक्षण छीना जा रहा है. मैंने हमेशा कहा है कि टॉप ब्यूरोक्रेसी समेत देश के सभी शीर्ष पदों पर वंचितों का प्रतिनिधित्व नहीं है, उसे सुधारने के बजाय लेटरल एंट्री द्वारा उन्हें शीर्ष पदों से और दूर किया जा रहा है. यह UPSC की तैयारी कर रहे प्रतिभाशाली युवाओं के हक़ पर डाका और वंचितों के आरक्षण समेत सामाजिक न्याय की परिकल्पना पर चोट है. ‘चंद कॉरपोरेट्स’ के प्रतिनिधि निर्णायक सरकारी पदों पर बैठ कर क्या कारनामे करेंगे इसका ज्वलंत उदाहरण SEBI है, जहां निजी क्षेत्र से आने वाले को पहली बार चेयरपर्सन बनाया गया. प्रशासनिक ढांचे और सामाजिक न्याय दोनों को चोट पहुंचाने वाले इस देश विरोधी कदम का INDIA मजबूती से विरोध करेगा. ‘IAS का निजीकरण’ आरक्षण खत्म करने की ‘मोदी की गारंटी’ है. ”

बता दे कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शनिवार को 45 पदों के लिए विज्ञापन दिया था जिनमें 10 संयुक्त सचिव और 35 निदेशक/उप सचिव के पद शामिल हैं. ये पद अनुबंध के आधार पर ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए भरे जाने हैं.

दूसरे एआरसी को भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. आयोग ने सिविल सेवाओं के भीतर कार्मिक प्रबंधन में सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया. इसकी एक प्रमुख सिफारिश यह थी कि ऐसे उच्च सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री शुरू की जाए जिसके लिए विशेष ज्ञान और कौशल की आवश्यकता होती है.

एआरसी ने पेशेवरों के एक प्रतिभा पूल के निर्माण का भी प्रस्ताव दिया था जिन्हें अल्पकालिक या संविदा के आधार पर सरकार में शामिल किया जा सके. उसने सुझाव दिया था कि मौजूदा सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री से प्रवेश पाने वाले अधिकारियों को इस तरह से एकीकृत किया जाना चाहिए कि सिविल सेवा की अखंडता और लोकाचार को बनाए रखा जा सके और साथ ही उनके विशेष कौशल का लाभ उठाया जा सके.

इससे पहले मोरारजी देसाई (और उनके बाद के. हनुमंतैया) की अध्यक्षता में 1966 में गठित प्रथम एआरसी ने भी सिविल सेवाओं के भीतर विशेष कौशल की आवश्यकता पर बल देते हुए भविष्य की में इस पर चर्चा के लिए आधार तैयार किया था. हालांकि प्रथम एआरसी ने सीधे-सीधे लेटरल एंट्री की वकालत नहीं की थी.

सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार पारंपरिक रूप से एक लेटरल एंट्री से शामिल अधिकारी होता है, जो नियमों के अनुसार, 45 वर्ष से कम आयु का होता है और हमेशा एक प्रख्यात अर्थशास्त्री होता है.

मोदी सरकार ने 2018 में संयुक्त सचिवों और निदेशकों जैसे वरिष्ठ पदों के लिए लेटरल एंट्री के जरिए पहली बार भर्ती की थी. अब दूसरी बार इस तरह की पहल की जा रही है.

हिंदी पोस्ट वेब डेस्क/आईएएनएस

 

 


The Hindi Post

You may have missed

error: Content is protected !!