“….आप बंद कमरे में रहकर बहुत दिन छिप नहीं सकते, एक दिन हम बाहर खींचकर….”, अमित शाह के लिए बोले मल्लिकार्जुन खरगे
“….आप बंद कमरे में रहकर बहुत दिन छिप नहीं सकते, एक दिन हम बाहर खींचकर….”, अमित शाह के लिए बोले मल्लिकार्जुन खरगे
लोकसभा में पास होने के बाद लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्यसभा में चर्चा एवं पारित करवाने के लिए पेश किया गया. राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट पेपर लीक मामले और जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तीखे सवाल पूछे. साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला.
उन्होंने कहा, “दिल्ली में इतनी गड़बड़ हो रही है, आप गृह मंत्री हैं, लेकिन इसके बाद भी आपका मुंह भी नहीं खुलता, क्या कोई सिल दिया है क्या मुंह को, बंद कर दिया? बोलना चाहिए था खुलकर, देश की भलाई के लिए बोलना पड़ता है. मैं नहीं बोलूंगा… अगर यह बोलेंगे तो सबक स्टूडेंट ने सिखाया है तो इससे डबल एक दिन फिर आपको सिखाएंगे.”
खरगे ने कहा, “20 जुलाई को हजारों छात्र संसद की ओर शांतिपूर्वक मार्च कर रहे थे, वे संवाद चाहते थे, लेकिन उन्हें मिला लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गैस, करंट वाले बैरिकेड्स, मेट्रो-रेलवे स्टेशन बंद. यह सब आपने किया और इससे छात्र चिढ़ गए, नागरिक भी गुस्से में रहे. इसलिए उनको यह आंदोलन करना पड़ा, लेकिन आप संभाल नहीं सके. शांति से बात नहीं कर सके. 100 से अधिक छात्र इस आंदोलन में थे, वे घायल हो गए. आईसीयू में पहुंच गए. कई बच्चों को आंखों में पैलेट गन के छर्रे लगे. टीवी में सब दिखाया जा रहा है. यह देखकर हमको काफी शर्म आई. उनको आई यह नहीं पता. मेरे छात्र जो गांव से आए, उन बच्चों को पैलेट का इस्तेमाल करके मार रहे हैं.”
खरगे ने आगे कहा, “जिन स्टूडेंट्स के हाथ-पैर टूटे, उसका जिम्मेदार कौन है? गृह मंत्री जिम्मेदार हैं. आप बंद कमरे में रहकर मेरी बात सुन रहे होंगे. लेकिन आप बंद कमरे में रहकर बहुत दिन छिप नहीं सकते, एक दिन हम बाहर खींचकर लाएंगे और जनता के सामने बैठाएंगे.” खरगे के इस बयान पर भाजपा नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सवाल खड़े किए और इन शब्दों को असंसदीय कहा. नड्डा ने कहा, “राज्यसभा के नेता विपक्ष को हम शांति से सुन रहे हैं ओर यहां लोकतंत्र में शांति से सुनना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन उनसे निवेदन है कि तर्क के साथ भावावेश में न आएं और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें जो असंसदीय है.”
