भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज अदा की गई, इतने हजार जवान रहे तैनात

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भोजशाला परिसर (फोटो: आईएएनएस)

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भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच नमाज अदा की गई, इतने हजार जवान रहे तैनात

 

धार | सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शांतिपूर्वक जुमे की नमाज अदा की.

नमाज करीब 20 मिनट तक चली. यह नमाज सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय दोपहर 1 से 3 बजे के बीच कराई गई. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासन ने मुस्लिम प्रतिनिधियों को सुरक्षित तरीके से परिसर तक पहुंचाया. उन्हें बख्तरबंद वाहन में ले जाया गया.

कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, दोनों समुदायों के लिए परिसर में अलग-अलग स्थान और आने-जाने के रास्ते तय किए गए थे. पुलिस सूत्रों के अनुसार, नमाज पूरी होने के बाद सभी लोगों को सुरक्षित रूप से परिसर से वापस ले जाया गया.

हिंदुओं की याचिका पर गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बसंत पंचमी पर हिंदू समुदाय को सरस्वती पूजा और उससे जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज करने की अनुमति दी थी. वहीं दो घंटे की समय सीमा में मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी.

अदालत ने अपने फैसले में आपसी सम्मान, सहनशीलता और स्थानीय प्रशासन के साथ पूरे सहयोग पर जोर दिया ताकि 11वीं सदी के एएसआई संरक्षित स्मारक में शांति बनी रहे. यह वही स्थल है जिसे हिंदू समुदाय लंबे समय से सरस्वती मंदिर और मुस्लिम समुदाय कमल मौला मस्जिद के रूप में पहचानते आए हैं.

बसंत पंचमी के दिन धार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. शहर में आठ हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी. इसमें वरिष्ठ अधिकारी, महिला पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियां शामिल थीं. इसके अलावा बीस से अधिक एआई ड्रोन के जरिए हवाई निगरानी भी की गई.

पूरे इलाके की 3डी मैपिंग कर चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई. यह संतुलित व्यवस्था लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद की गई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया.

हिंदू श्रद्धालुओं ने सुबह के समय केसरिया सजावट के साथ फूल चढ़ाकर सरस्वती पूजा की. वहीं मुस्लिम पक्ष ने तय समय के अनुसार अपनी धार्मिक गतिविधियां पूरी कीं. इसे इस संवेदनशील स्थल पर आपसी सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है. अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि इस स्थान से जुड़ा मलिकाना हक का बड़ा विवाद अभी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

 


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