होटल के कमरे में खुदकुशी करने का मामला : प्रेमी युगल से जुड़ी चौंकाने वाला जानकारियां आई सामने
सांकेतिक तस्वीर (AI Photo)
होटल के कमरे में खुदकुशी करने का मामला : प्रेमी युगल से जुड़ी चौंकाने वाला जानकारियां आई सामने
कानपुर के घंटाघर स्थित होटल सूर्या में शादीशुदा प्रेमी युगल ने खुदकुशी कर ली. प्रेमी युगल जान देने के इरादे से ही होटल पहुंचा था. पुलिस की जांच में पता चला कि दोनों शनिवार को घर से ही जान देने के इरादे से निकले थे. होटल पहुंचने से पहले दिग्विजय ने फतेहपुर स्टेशन से इंस्टाग्राम पर एक दर्दभरी रील पोस्ट की.
उसमें लिखा था, “मैं अपने दर्द की किताब लिखूं तो लोग इश्क से डर जाएंगे… मैं मरने जा रहा हूं.” एक अन्य रील में उसने लिखा, “कैसे कह दूं कि उसकी मोहब्बत झूठी है… उसके हाथों से निवाला खाया है मैंने.” वहीं, एक पोस्ट में लिखा कि “पर्सनल लाइफ से परेशान हूं… अब थोड़ा अपनी इमेज सुधारना चाहता हूं.”
घंटाघर स्थित होटल सूर्या के कमरा नंबर 106 में उन्नाव के कोतवाली क्षेत्र के अकरमपुर मगरवारा निवासी शिवांगी तिवारी (32) और फतेहपुर के राधानगर नई बस्ती निवासी दिग्विजय सिंह (33) के शव मिले थे.
शिवांगी के पति धीरू तिवारी ने बताया कि करीब एक साल पहले उनकी पत्नी शिवांगी की फेसबुक के जरिए दिग्विजय से दोस्ती हुई थी. उनके गुजरात में रहने का फायदा उठाकर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं. पुलिस के अनुसार, जहर निगलने के बाद शिवांगी ने अपने पति को आखिरी बार फोन किया.
आवाज में दर्द था. उसने सिर्फ इतना कहा कि “मैंने जहर खा लिया है… अब बच्चों के साथ मजे से रहना.” इसके बाद फोन कट गया. पुलिस जांच में पता चला कि 9 जून को दिग्विजय और शिवांगी परिवार छोड़कर गुजरात चले गए थे, जहां से उन्नाव पुलिस ने उन्हें ढूंढ निकाला था. पुलिस ने दोनों को इस शर्त पर छोड़ा था कि अब दोनों आपस में कोई संबंध नहीं रखेंगे.
दोनों के थाने में ही सिम कार्ड तोड़ दिए गए और दोनों ने नए मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने शुरू कर दिए. लेकिन एक महीने के भीतर ही उनकी फिर से बातचीत शुरू हो गई. एसीपी कलक्टरगंज आनंद ओझा ने बताया कि कॉल डिटेल, सोशल मीडिया पोस्ट और चैट के आधार पर पुलिस पूरे मामले की पहले से बनाई गई आत्महत्या की योजना के एंगल से जांच कर रही है.
कानपुर के घंटाघर स्थित सूर्या होटल के कमरा नंबर 106 में शिवांगी और दिग्विजय शनिवार दोपहर से ठहरे थे. उस कमरे में साढ़े तीन घंटे के भीतर आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया. इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस होटल कर्मियों से एक-एक मिनट की जानकारी ले रही है. साथ ही वहां लगे सीसीटीवी फुटेज भी गंभीरता से खंगाले जा रहे हैं. दोनों के मोबाइल की कॉल डिटेल और व्हाट्सऐप चैट की भी जांच की जा रही है.
पुलिस के अनुसार, दोपहर 12:30 बजे जब दोनों होटल में दाखिल हुए तो सीसीटीवी फुटेज में उनके चेहरों पर आत्महत्या जैसा कोई तनाव या घबराहट नहीं दिख रही थी. कमरे में जाने के बाद दोनों ने कमरा भी बंद नहीं किया और बाहर भी नहीं निकले. शाम करीब 4 बजे शिवांगी के चीखने पर घटना का पता चला.
पुलिस यह भी आशंका जता रही है कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ हो. फिलहाल हर पहलू पर जांच की जा रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों पहले भी सूर्या होटल में ठहर चुके हो सकते हैं. इसकी पुष्टि के लिए होटल का रजिस्टर भी खंगाला जा रहा है.
शिवांगी सदर कोतवाली के मोहल्ला अकरमपुर की रहने वाली थी. वह वकालत की पढ़ाई करने के साथ शहर के एक अधिवक्ता के बस्ते पर प्रैक्टिस भी करती थी. हालांकि दिग्विजय से रिश्ते के चलते परिवार में विवाद बढ़ने के कारण वह जनवरी से कचहरी नहीं गई थी. शिवांगी के पति स्कूल में वैन चलवाते थे, लेकिन पिछले तीन महीने से गुजरात में थे. शिवांगी के 12 साल का बेटा और 9 साल की बेटी है.
पुरवा कोतवाली के भादिन गांव (मायका) की रहने वाली शिवांगी की शादी 15 साल पहले सदर कोतवाली के अकरमपुर निवासी धीरू तिवारी से हुई थी. बच्चों की अच्छी परवरिश और शिवांगी की पढ़ाई के लिए धीरू तीन महीने पहले गुजरात के अहमदाबाद कमाने चले गए थे. घटना की सूचना मिलते ही शिवांगी के पिता राजेंद्र शुक्ला और अन्य परिजन कानपुर के लिए रवाना हो गए.
पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि शिवांगी पढ़ाई के साथ उनके बस्ते पर सीखने के लिए भी आती थीं. कुछ दिन पहले उन्होंने फोन कर दिग्विजय के साथ सहमति संबंध के लिए न्यायालय से ऐसा आदेश दिलाने की बात कही थी, जिससे परिवार के लोग उन्हें परेशान न करें. वह बिना तलाक लिए ही सहमति संबंध चाहती थीं.
मां के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब 12 बजे शिवांगी ने अपने पिता राजेंद्र शुक्ल को फोन कर बताया था कि उसकी सहेली की तबीयत खराब है और उसे देखने कानपुर जा रही है. मां ने बताया कि दामाद को सूचना दे दी गई है और वह घर के लिए निकल चुके हैं.
फतेहपुर. राधानगर पुलिस से दिग्विजय की मौत की सूचना मिलते ही उसके चाचा आशीष सिंह और जयप्रकाश सिंह शनिवार रात कानपुर के लिए रवाना हो गए. राधानगर थाना क्षेत्र के रमवां गांव का रहने वाला दिग्विजय कई वर्षों से परिवार के साथ शहर के सुंदरमती इंटर कॉलेज, पूर्वी नई बस्ती में रह रहा था. वर्ष 2013 में उसकी शादी कीर्तिखेड़ा निवासी वंदना से हुई थी. दोनों का 10 वर्षीय बेटा ज्ञान सिंह है. दिग्विजय के छोटे भाई का नाम अभिमर्दन सिंह है.
चाचा जयप्रकाश सिंह ने बताया कि दिग्विजय रेलवे में एक निजी एजेंसी के माध्यम से अटेंडेंट के पद पर कार्यरत था. वह शनिवार सुबह प्रयागराज के सूबेदारगंज से मथुरा जाने वाली ट्रेन में ड्यूटी के लिए घर से निकला था.
