गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से देश में पहली संदिग्ध मौत, स्वास्थ्य विभाग बोला 16 मरीज वेंटिलेटर पर, क्या हैं GBS?

Hospital View ICU Depositphotos_199468812_S (1) (1)
The Hindi Post

मुंबई | महाराष्ट्र में जीबीएस नाम की बीमारी ने लोगों को डरा दिया है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से जुड़ी पहली संदिग्ध मौत सोलापुर से रिपोर्ट हुई है. आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर विभाग ने इसकी जानकारी दी.

इस प्रेस रिलीज के मुताबिक, प्रदेश में जीबीएस के 101 रोगियों में 68 पुरुष और 33 महिलाएं हैं. 19 बच्चों की उम्र 9 साल से कम है. 50 से लेकर 83 साल की उम्र के 23 मरीज हैं. वही 16 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया हैं.

विभाग के अनुसार 81 मरीज पुणे नगर निगम से, 14 पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम से और 6 अन्य जिलों से हैं. वहीं सोलापुर जिले से एक संदिग्ध की मौत की भी सूचना है.

गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ प्रतिरक्षा तंत्रिका विकार है जो अचानक सुन्नता और मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनती है. इस स्थिति में शरीर की तंत्रिकाओं पर हमला होता हैं. प्रतिरक्षा प्रणाली ही तंत्रिकाओं पर हमला कर देती हैं. इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ जाता हैं.

पुणे नगर निकाय के सूत्रों के अनुसार, जीबीएस के लक्षणों में दस्त, पेट दर्द, बुखार और मतली या उल्टी शामिल हैं.

सूत्रों ने कहा, “जीबीएस संक्रमण दूषित पानी या भोजन के सेवन से हो सकता है. इस संक्रमण से दस्त और पेट दर्द भी हो सकता है. कुछ व्यक्तियों में, प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) तंत्रिकाओं (नसों) पर हमला करती है. इसके परिणामस्वरूप 1 से 3 सप्ताह के भीतर GBS से संक्रमित होने के बारे में पता चलता है. इसके अलावा, डेंगू, चिकनगुनिया वायरस या अन्य बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी इम्यून सिस्टम नसों पर हमला बोल देता हैं.”

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को उबला हुआ पानी पीने और बासा भोजन नहीं खाने की सलाह दी है. हाथ और पैरों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी आने पर डॉक्टर से परामर्श लेने या नजदीकी सरकारी अस्पताल जाने की भी सलाह दी गई हैं.

वही स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग बढ़ा दी है और कहा है कि लोगों को पैनिक (घबराए नहीं) करने की जरुरत नहीं हैं.

पुणे से सबसे ज्यादा मामले सामने आने के बाद, राज्य स्तरीय त्वरित प्रतिक्रिया दल ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया. पुणे नगर निगम और ग्रामीण जिला अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. मरीजों के मल के 7 नमूने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे को भेजे गए हैं. कुल 23 रक्त नमूनों की जांच की गई है.

क्या हैं गुइलेन-बैरे सिंड्रोम या जीबीएस?

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम या जीबीएस यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही पेरिफेरल नसों पर हमला बोल देता हैं. इससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं, पैरालाइसिस भी हो सकता है. आमतौर पर शुरुआती इलाज से ही इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है और 2-3 हफ्ते के अंदर रिकवरी भी संभव है. ज्यादातर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ मरीजों में बाद में भी कमजोरी की शिकायत बनी रहती है.

 


The Hindi Post

You may have missed

error: Content is protected !!