भाजपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन का मामला: कांग्रेस ने अपनी पार्टी के इन नेताओं पर की कार्रवाई

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AI तस्वीर / (फोटो क्रेडिट : ChatGPT)

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भाजपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन का मामला: कांग्रेस ने अपनी पार्टी के इन नेताओं पर की कार्रवाई

 

मुंबई | महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक प्रेसिडेंट प्रदीप पाटिल को सस्पेंड कर दिया है. यह कार्रवाई एमपीसीसी के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल की तरफ से की गई है.

कांग्रेस नेता गणेश पाटिल ने अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक प्रेसिडेंट प्रदीप पाटिल को एक पत्र लिखा है.

उन्होंने पत्र में लिखा है, “हमने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर नगर निगम चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीती लेकिन राज्य नेतृत्व या राज्य कार्यालय को बिना बताए, आपने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया और यह बात हमें मीडिया सोर्स से पता चली है. यह अच्छी बात नहीं है, इसलिए राज्याध्यक्ष हर्षवर्धन के निर्देशानुसार, आपको पार्टी से निलंबित किया जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि यह पार्टी के प्रति वफादारी का उल्लंघन है. इसके साथ ही हमारी ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारी समिति को भंग किया जा रहा है. इसी प्रकार, हमारे साथ पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वाले सभी पार्षदों को भी पार्टी से निलंबित किया जा रहा है. नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत के बावजूद भाजपा से कथित गठजोड़ की खबरों के बाद यह कार्रवाई की गई.

यह कार्रवाई अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवारों के बावजूद भाजपा के साथ कथित गठबंधन करने के आरोपों के बाद की गई है.

दरअसल, भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत हासिल किया है.

अंबरनाथ ठाणे जिले में स्थित है, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह जिला भी माना जाता है.

हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों में भाजपा ने अंबरनाथ में शिवसेना को हराकर वहां का शासन खत्म कर दिया.

हालांकि शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन भाजपा ने एक अप्रत्याशित गठबंधन बनाकर नगर परिषद अध्यक्ष पद हासिल कर लिया और बहुमत भी बना लिया.

59 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को 23 सीटें मिलीं, भाजपा को 16, कांग्रेस को 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) को 4 सीटें मिलीं.

भाजपा (16), कांग्रेस (12), और एनसीपी (4) साथ आ गए जिससे बहुमत का आकड़ा हासिल हो गया. इसके साथ ही शिंदे गुट की शिवसेना (23 सीटें) लेकर विपक्ष की भूमिका में आ गई.

 


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