निकाय चुनाव: कांग्रेस से गठबंधन करने के बाद बीजेपी ने ओवैसी की पार्टी से मिलाया हाथ
AI तस्वीर / (फोटो क्रेडिट : ChatGPT)
निकाय चुनाव: कांग्रेस से गठबंधन करने के बाद बीजेपी ने ओवैसी की पार्टी से मिलाया हाथ
अकोट/ठाणे | महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में अप्रत्याशित गठबंधनों का दौर जारी है. शिवसेना से अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता छीनने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद अब बीजेपी ने अकोट नगर परिषद में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन कर चौंकाया है. बीजेपी अकोट में नगर निगम की कमान अपने हाथ में लेना चाहती है.
अकोट में सत्ता की नई गणित
अकोट नगर परिषद में बीजेपी की माया धुले अध्यक्ष चुनी गई थी जबकि उनकी पार्टी 35 सदस्यीय परिषद में बहुमत के आकड़े से पीछे रह गई थी. पिछले महीने हुई 33 सीटों की चुनावी जंग में बीजेपी को केवल 11 सीटें मिली थी. बहुमत जुटाने के लिए पार्टी ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम का नया मोर्चा बनाया.
राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने वाला कदम यह रहा कि AIMIM, जिसने अकोट नगर परिषद चुनाव में पांच सीटें जीती थीं और जो बीजेपी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थी, वह अब बीजेपी-नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो चुकी है.
इस नए मोर्चे में केवल AIMIM ही नहीं, बल्कि शिवसेना के दोनों गुट (शिंदे और उद्धव ठाकरे), एनसीपी के दोनों गुट (अजित पवार और शरद पवार) और बच्चू काडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल हैं.
बीजेपी पार्षद रवि ठाकुर को इस गठबंधन का नेता नियुक्त किया गया है. साथ ही, बीजेपी ने एक व्हिप जारी किया है जिसके तहत सभी सहयोगी दलों के पार्षदों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान के दौरान बीजेपी के निर्देशों के अनुसार ही वोट करेंगे.
इस समीकरण के कारण अकोट नगर परिषद में सत्ता पक्ष ने मजबूत बहुमत हासिल कर लिया. गठबंधन को 25 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है और अध्यक्ष का वोट जोड़कर इसकी प्रभावी संख्या 26 हो जाती है.
अकोट नगर परिषद के चुनावी नतीजों का अंतिम आंकड़ा इस प्रकार है (कुल 33 सीटें):
– बीजेपी: 11
– कांग्रेस: 6
– AIMIM: 5
– प्रहार जनशक्ति पार्टी: 3
– शिवसेना (UBT): 2
– एनसीपी (अजित पवार गुट): 2
– वंचित बहुजन आघाड़ी: 2
– शिवसेना (शिंदे गुट): 1
– एनसीपी (शरद पवार गुट): 1
इस तालिका से साफ है कि कोई भी दल अकेले दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाया और सत्ता का समीकरण गठबंधन पर टिका है.
अकोट में बना यह गठबंधन राजनीतिक हलकों में विवाद का कारण बन गया है. वजह यह है कि हाल ही में विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने जोरदार तरीके से “बटेंगे तो कटेंगे” अभियान चलाया था. आलोचकों का कहना है कि उस नारे और AIMIM के साथ हुए इस अप्रत्याशित गठबंधन के बीच स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है.
अब बात अंबरनाथ नगर परिषद की
ऐसा ही कुछ ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद के लिए हुए चुनाव में देखने को मिला. यहां बीजेपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया. बीजेपी का यह कदम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए यह बड़ा झटका है. एकनाथ शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी है.
अंबरनाथ नगर परिषद (ठाणे जिला) के 60 सदस्यीय सदन में चुनावी नतीजे इस प्रकार रहे –
– शिवसेना (शिंदे गुट): 27 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
– बीजेपी: 14 सीटें
– कांग्रेस: 12 सीटें
– एनसीपी (अजित पवार गुट): 4 सीटें
– निर्दलीय: 3 सीटें
बीजेपी ने कांग्रेस, एनसीपी और दो निर्दलीयों के साथ मिलकर 32 सीटों का बहुमत हासिल कर लिया. इस गठबंधन ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया और शिवसेना (शिंदे गुट) को अब विपक्ष में बैठना पड़ेगा.
शिवसेना, एक निर्दलीय के समर्थन के बावजूद, कुल 28 सीटें ही हासिल कर सकी है और सत्ता से बाहर हो गई है.
बीजेपी के राष्ट्रीय नारे “कांग्रेस-मुक्त भारत” के विपरीत, स्थानीय इकाई ने अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के सहयोग से सत्ता हासिल कर ली है. इस कदम ने महायुति गठबंधन के भीतर स्पष्ट असंतोष पैदा कर दिया है.
IANS
