लखनऊ अग्निकांड: चार साल का प्यार और सात फेरों से पहले ही मौत ने छीन लिया साथ

LUCKNOW FIRE CASE

फोटो: आईएएनएस

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लखनऊ अग्निकांड: चार साल का प्यार और सात फेरों से पहले ही मौत ने छीन लिया साथ

 

लखनऊ | चार साल पहले एक ही ऑफिस में साथ काम करते हुए दो दिल मिले थे. धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली, रिश्ते ने भरोसे की मजबूत नींव पाई और दोनों ने साथ जिंदगी बिताने के सपने सजाने शुरू कर दिए. परिवारों की रजामंदी मिल चुकी थी, शादी की तैयारियां चल रही थीं और घरों में खुशियों की आहट सुनाई देने लगी थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जिन घरों में खुशियां दस्तक देने को तैयार थीं वहां अब मातम का माहौल है.

लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने 29 वर्षीय नीलेश और उनकी मंगेतर की जिंदगी भी छीन ली. नीलेश अपने परिवार की उम्मीद थे. उनकी मां की आंखों से आंसू थम नहीं रहे, पिता सदमे में हैं और बहन बार-बार भाई की यादों में टूट जा रही है. घर में जहां शादी की बातें होती थीं वहां अब सिर्फ सन्नाटा है.

परिजनों ने दमकल विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर दमकल पहुंच जाती तो नीलेश समेत कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं. नीलेश के बड़े भाई ने बताया कि मुझे केजीएमयू से फोन आया कि कोई घटना हुई है. वह फोन पर पूरी बात नहीं बता सके. जब हम अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि नीलेश नहीं रहा.

उन्होंने कहा कि भाई 3 डी डिजाइनर था. गेम के कैरेक्टर्स और प्रॉप्स बनाता था. उसकी मंगेतर भी डिजाइनर थी. दोनों चार साल से एक ही ऑफिस में काम कर रहे थे. आग नीचे की मंजिल पर लगी जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा. मेरे भाई और उसकी मंगेतर की भी मौत हो गई.

दूसरी ओर, नीलेश के भाई ने सवाल उठाया कि 10 साल पहले ही इस बिल्डिंग को अवैध घोषित किया जा चुका था फिर भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई. नीलेश के परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां पर आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं थी.घटना के दौरान दमकलकर्मी भी टाइम पर नहीं पहुंचे. अगर सही समय पर पानी पहुंचता तो मेरा भाई आज हमारे बीच होता.

प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि हम काम कर रहे थे. अचानक स्टाफ ने बताया कि शॉर्ट सर्किट से आग लग गई है. हम बाहर निकलने लगे लेकिन बिजली चली गई थी. बायोमेट्रिक मशीन काम नहीं कर रही थी. दरवाजा नहीं खुल रहा था. सीढ़ियों में घना धुआं भर गया था. तौलिए से मुंह ढककर किसी तरह खिड़की से कूदकर हम निकले.

एक अन्य व्यक्ति ने भावुक होते हुए कहा कि मेरी बहन भी इस अग्निकांड में हमें छोड़कर चली गई. हमारे परिवार में अकेली कमाने वाली सदस्य थीं. पिता का दो साल पहले निधन हो चुका है. अब परिवार का एकमात्र सहारा भी चला गया.

हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने अपील की है कि ऐसी घटनाओं में लोग सिर्फ वीडियो बनाने के लिए न जुटें, बल्कि स्थानीय स्तर पर मदद के लिए आगे आएं ताकि जिंदगियां बचाई जा सकें.

आईएएनएस

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