कतर में मौत की सजा पाए 8 भारतीय नौसैनिकों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया, विदेश मंत्रालय ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची (फाइल फोटो)

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कतर में 8 भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा दिए जाने के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. दरअसल, भारतीय राजदूत को कॉन्सुलर एक्सेस (राजनयिक पहुंच) मिला है. भारतीय राजनयिक ने जेल में बंद इन लोगों से मुलाकात की है और उन्हें केस की जानकारी दी है. मामले में दो बार सुनवाई हो चुकी है और अगली सुनवाई जल्द होगी.

विदेश मामलों के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान गुरुवार को कहा, “हमारे राजदूत ने तीन दिसंबर को जेल में बंद सभी आठ लोगों से मुलाकात की.”

उन्होंने कहा कि हम सभी आठ लोगों को कानूनी और राजनयिक सहायता प्रदान कर रहे है. बागची ने यह भी कहा कि इस मामले में इस साल 30 नवंबर और 23 सितंबर को दो सुनवाई हो चुकी है और जल्द ही अगली सुनवाई होगी.

उन्होंने कहा, “भारत ने अपील भी दायर की है और अगली सुनवाई जल्द ही होने वाली है. हम इस मामले में बारीकी से नजर रख रहे हैं.”

बता दें कि, पिछले साल कतर में गिरफ्तार किए गए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को 27 अक्टूबर, 2023 को कतर की अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. बीते महीने सामने आया था कि कतर के कोर्ट ने मौत की सजा पाए पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों की अपील स्वीकार कर ली है और जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई की जाएगी. यह अपील भारत सरकार द्वारा दायर की गई थी.

पिछले साल 25 अक्टूबर को मीतू भार्गव नाम की महिला ने ट्वीट कर बताया था कि भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसर 57 दिन से कतर की राजधानी दोहा में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में हैं. मीतू भार्गव कमांडर पूर्णेदु तिवारी की बहन हैं. इन आठ पूर्व नेवी अधिकारियों में से एक है पुर्णेन्दु तिवारी. इन अफसरों पर कथित तौर पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप है.

कतर के अधिकारियों द्वारा इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाए जाने के बाद पिछले साल आठ भारतीयों को गिरफ्तार कर लिया गया था. इन लोगों में सम्मानित अधिकारी भी शामिल हैं जिन्होंने एक समय प्रमुख भारतीय युद्धपोतों की कमान संभाली थी.

बता दे कि पूर्व नौसेना कर्मियों की जमानत याचिकाएं कई बार खारिज की जा चुकी है. इसके साथ ही उनकी हिरासत की अवधी को भी समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है.

नौसेना से रिटायर्ड ये सभी अफसर दोहा स्थित अल-दहरा कंपनी में काम करते थे. ये कंपनी टेक्नोलॉजी और कंसल्टेसी सर्विस प्रोवाइड करती थी. साथ ही कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और सामान भी मुहैया कराती थी.

हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
(इनपुट्स: आईएएनएस)

 


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