‘पति के जख्म को देखा तब….’, पहलगाम हमले की बरसी पर बोली शुभम द्विवेदी की पत्नी

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फोटो: आईएएनएस

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‘पति के जख्म को देखा तब….’, पहलगाम हमले की बरसी पर बोली शुभम द्विवेदी की पत्नी

 

कानपुर | पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर शुभम द्विवेदी की पत्नी ने अपने दर्द बयां किए. उन्होंने कहा कि कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें जिंदगी भर भुलाया नहीं जा सकता. इस घटना ने उनके परिवार को इतना तोड़ दिया था कि बोलने और खुद को संभालने की हिम्मत भी नहीं बची थी. कई लोग ऐसे सदमे में डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, लेकिन आज वह मजबूती से सामने आकर अपनी बात रख पा रही हैं, क्योंकि उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाने का फैसला किया है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस से मंगलवार को खास बातचीत में शुभम द्विवेदी की पत्नी ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटना की वजह से लोग मुझे जानने लगे. मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी कि लोग मुझे इस तरीके से जानें. मैं जिस बैकग्राउंड से आती हूं, वह एक आर्टिस्ट का बैकग्राउंड है. मेरा सपना हमेशा यही रहा कि लोग मुझे मेरी कला के नाम से, मेरी मेहनत और टैलेंट से जानें. जिस तरीके से आज लोग मुझे जान रहे हैं, वह मैं कभी नहीं चाहती थी. लोग अब मुझसे मिलने आते हैं, चाहे वो नेता हों, बिजनसमैन हों या आम इंसान, सभी एक ही मोटिव से आते हैं. वे श्रद्धांजलि देने आते हैं, शुभम के बारे में पूछते हैं, मेरे परिवार के बारे में जानना चाहते हैं. अभी तक किसी ने भी राजनीति या कोई दूसरा मोटिव लेकर बात नहीं की.”

उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह रही कि किसी ने भी इस दुख में राजनीति नहीं घुसाई. सभी लोग एक ही मकसद से आए, श्रद्धांजलि देने और हमारे परिवार का हाल जानने.

अपनी निजी जिंदगी के बदलाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि शादी के कुछ ही महीनों बाद उनकी जिंदगी में ऐसा भयानक मोड़ आ गया, जो किसी के साथ नहीं होना चाहिए. मेरी शादी से पहले की जिंदगी और शादी के दो महीने और उसके बाद जिस तरीके से मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई, यह बदलाव मैं अपने सबसे बड़े दुश्मन के साथ भी नहीं चाहूंगी. यह ऐसा बदलाव है जो इंसान को अंदर तक तोड़ देता है. जिसने अपनी आंखों के सामने अपने जीवनसाथी को गोली लगते देखा हो, वह उसे कभी नहीं भूल सकता. कुछ बच्चों ने अपने पिता को, कुछ ने अपने बच्चे को मरते देखा. ये वो दृश्य हैं जो जीवन भर नहीं भुलाए जा सकते. कोई भी नई याद, कोई भी नई खुशी इस दर्द को फीका नहीं कर सकती. भूलना कोई विकल्प नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा दर्द कहीं ना कहीं अब मेरी ताकत बन गया है. यही दर्द मुझे बोलने की हिम्मत देता है. वरना इंसान इतना टूट जाता है कि उसकी आवाज भी नहीं निकलती, वह उठ भी नहीं पाता. कई लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं. लेकिन अगर आज मैं बोल पा रही हूं, आप सबसे बात कर पा रही हूं, तो इसलिए क्योंकि मैंने इस दर्द को अपनी ताकत बना लिया है. इसलिए मैं इसे भूलूंगी नहीं. अब अपनी पूरी जिंदगी में मुझे इस ताकत की बहुत जरूरत है.

 

‘पति के जख्म को देखा, तब दर्द को ताकत बनाकर जीना सीखा’, पहलगाम हमले की बरसी पर शुभम द्विवेदी की पत्नी


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