हरियाणा कोर्ट ने निकिता तोमर के हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई

Nikita Tomar
The Hindi Post

फरीदाबाद (हरियाणा) | फरीदाबाद की एक अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में दिनदहाड़े निकिता तोमर की हत्या के मामले में शुक्रवार को दो दोषियों – तौसीफ अहमद और रेहान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में सुनवाई 1 दिसंबर को शुरू हुई थी। इसके लगभग चार महीने बाद बुधवार को जिला सत्र न्यायालय ने दोनों को बल्लभगढ़ में बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा 21-वर्षीय निकिता की नृशंस हत्या का दोषी पाया था। हालांकि उस दिन सजा की घोषणा नहीं की गई थी।

दोनों दोषियों को धारा 302 (हत्या), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण), धारा 506 (आपराधिक धमकी), 120-बी (आपराधिक साजिश) और भारतीय दंड संहिता के 34 (समान इरादे) के तहत दोषी पाया गया था। अक्टूबर में गिरफ्तारी के बाद से दोनों जेल में हैं।

इस मामले में तीसरे आरोपी मोहम्मद अजरुद्दीन, जिस पर दोनों को हथियार मुहैया कराने का आरोप था, को फरीदाबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरताज बसवाना ने बरी कर दिया।

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गौरतलब है कि अग्रवाल कॉलेज के बाहर निकिता का पूर्व सहपाठी तौसीफ ने उसे बिल्कुल पास से गोली मार दी थी। यह सारी घटना कैमरे में कैद हो चुकी थी। इस हत्या के मामले की सुनवाई 1 दिसंबर, 2020 से शुरू हुई।

पीड़ित परिवार ने दावा किया था कि यह ‘लव जिहाद’ का मामला था, जहां आरोपी तौसीफ ने पीड़िता पर इस्लाम अपनाने और उससे शादी करने का दबाव डाला।

तौसीफ और रेहान ने निकिता तोमर को अगवा करने की कोशिश की थी। जब उसने विरोध किया तो तौसीफ ने एक रिवाल्वर निकाली और उस पर गोली चला दी।

यह घटना 26 अक्टूबर को हुई जब निकिता तोमर कॉलेज से बाहर निकली। दो लोगों ने पहले उसे बंदूक की नोक पर अपने वाहन में खींचने की कोशिश की, और जब उसने विरोध किया तो उनमें से एक ने उसे गोली मार दी।

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27 अक्टूबर, 2020 को गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में 60 गवाहों के साथ 6 नवंबर को 700 पृष्ठ का आरोप पत्र दायर किया था।

इस हत्याकांड के बाद पूरे हरियाणा में विरोध प्रदर्शन हुए। अपराध की संवेदनशीलता को देखते हुए मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।

पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्होंने 2018 में तौसीफ के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की थी, लेकिन बाद में मामला सुलझ गया था।

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पीड़ित परिवार आजीवन कारावास की सजा से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि वे दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग करने के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देंगे।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने मीडिया को बताया कि निकिता के माता-पिता ने उसे शिक्षित किया और सोचा कि वह आत्म-निर्भर होने जा रही है। उस लड़की की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। मैं मृत्युदंड देने की मांग करना चाहूंगी।”

निकिता तोमर के पिता ने कहा कि अगर लव जिहाद के खिलाफ कानून पहले ही लागू किया गया होता तो उनकी बेटी को बचाया जा सकता था।

आईएएनएस

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