‘…..नोटबंदी काले धन को सफेद धन में बदलने का अच्छा तरीका’: जस्टिस नागरत्ना
नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असहमति व्यक्त करने वाली जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया था (असहमति व्यक्त की थी) क्योंकि नोटबंदी के कारण आम आदमी की परेशानी ने उन्हें हिलाकर रख दिया था.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एनएएलएसएआर विश्वविद्यालय (हैदराबाद) में एक संबोधन देते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “98% मुद्रा (500 और 1000 रुपये के नोट) आरबीआई के पास वापस आ गई. मैंने सोचा कि यह काले धन को सफेद धन में बदलने का एक अच्छा तरीका था. इसके बाद आयकर विभाग की कार्रवाई में क्या हुआ?, इसके बारे में हमें जानकारी नहीं है. सरकार के इस फैसले से आम आदमी बहुत को बहुत परेशानी हुई. आम आदमी की दुर्दशा के कारण ही मुझे असहमति जतानी पड़ी.”

उन्होंने कहा कि 500 और 1000 के नोट कुल मुद्रा का 86 प्रतिशत थे.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2023 में 4:1 के बहुमत से विमुद्रीकरण योजना की वैधता को बरकरार रखा था. इस मामले में सिर्फ जस्टिस नागरत्ना ने असहमति जताई थी.
हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
