आरिफ आम वाला…… कांवड़ यात्रा से पहले इस जिले की पुलिस ने ठेले पर टंगवाए दुकानदारों के नाम, VIDEO

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो क्रेडिट: आईएएनएस)

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लखनऊ | कांवड़ यात्रा की शुरुआत 22 जुलाई से होने जा रही है. यात्रा शुरू होने से पहले पुलिस ने कांवड़ रूट पर पड़ने वाले सभी दुकानदारों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं.

कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले सभी दुकानदारों को अपनी दुकानों पर मालिक और यहां काम करने वाले लोगों का नाम लिखना अनिवार्य कर दिया है. इसका कई जगहों पर असर भी दिखना शुरू हो गया है. इसके अलावा यात्रा के दौरान इस्तेमाल होने वाले डीजे की हाइट भी तय कर दी गई है.

मुजफ्फरनगर में यात्रा मार्ग पर खाने-पीने का सामान बेचने वाले ठेलों पर प्रशासन ने दुकानदारों के नाम टंगवा दिए हैं.

साथ ही कांवड यात्रा में इस्तेमाल होने वाले डीजे की हाइट भी प्रशासन ने तय कर दी है.

मेरठ के डीएम दीपक मीणा ने बताया कि कांवड़ियों के लिए जरूरी चीजों का इंतजाम कर लिया गया है, जिसमें पेयजल का खास ध्यान रखा गया है. कावड़ियों के लिए लगाए जाने वाले शिविर का भी सत्यापन किया जा रहा है. इसके अलावा ऊंची हाइट वाले डीजे को इस बार सड़कों पर नहीं उतरने दिया जाएगा.

दुकान पर मालिक के नाम का प्रदर्शन करने के पुलिस के आदेश के खिलाफ विपक्षी पार्टियां उतर आई है.

इसके बाद पुलिस ने अपने आदेश में संशोधन किया है. मुजफ्फरनगर पुलिस ने कहा, “श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में काँवड़िये हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं. श्रावण के पवित्र माह में कई लोग ख़ासकर काँवड़िये अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज़ करते हैं. पूर्व मे ऐसे दृष्टान्त प्रकाश में आये हैं जहां कांवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए जिससे कांवड़ियो मे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई. इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रद्धालुओं की आस्था के दृष्टिगत कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे एवं खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वे स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें. इस आदेश का आशय किसी प्रकार का धार्मिक विभेद ना होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप प्रत्यारोप एवं कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है. यह व्यवस्था पूर्व मे भी प्रचलित रही है.”

By IANS


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