“….एक पुलिस अफसर कह रहे थे कि नेता बनना छोड़ दो.. किसके लिए थी यह भाषा….”: अखिलेश यादव
यूपी पुलिस ने संभल में भड़की हिंसा मामले में सात FIR दर्ज की है. इन FIR में समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क का नाम भी शामिल है. इस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हिंसा वाले दिन जियाउर्रहमान बर्क संभल में मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने जियाउर्रहमान के खिलाफ FIR दर्ज होने पर सवाल उठाया.
अखिलेश ने कहा, “हमारे सांसद संभल में मौजूद ही नहीं थे. फिर भी उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई …. ऐसा उदाहरण पहले कभी देखने या सुनने को मिला है क्या?”
इसके बाद अखिलेश बोले, “एक पुलिस अफसर यह कह रहा कि नेता बनना छोड़ दो.. नेताओं का सहारा लेना छोड़ दो.. किसके लिए भाषा थी वो…… दुखद है इस घटना में नईम, बिलाल, रोमान, कैफ और अयान की जान चली गई. इसमें से कुछ कम उम्र के भी थे. मैंने लखनऊ में कहा था कि नईम की जान पुलिस की गोली से गई है.. पूरा का पूरा यह कराया गया दंगा है.. और किसने कराया सरकार ने कराया.. क्योंकि सरकार जो बेईमानी कर रही थी.. सरकार जिसने वोट लूटा.. सरकार जिसने EVM की बटन बार-बार पुलिस से दबवाई.. प्राइवेट ड्रेस में पुलिस लगवाई.. उस चुनाव में इनकी धांधली, इनकी चोरी न पकड़ी जाए इसलिए जानबूझकर संभल में यह घटना कराई है.”
सपा अध्यक्ष ने आगे कहा, “संभल की शाही जामा मस्जिद के खिलाफ 19 नवंबर 2024 को सिविल जज चंदौसी संभल के यहां एक याचिका डाली गई. कोर्ट ने दूसरे पक्ष की सुने बैगर उसी दिन सर्वे का आदेश दे दिया. हैरानी की यह बात है कि आर्डर मिलने के बाद संभल के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदेश को पढ़े बैगर ही दो घंटे बाद शाही जामा मस्जिद पहुंच गए. जामा मस्जिद की कमिटी ने सहयोग दिया. ढाई घंटे सर्वे के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक संभल ने कहा कि सर्वे का काम पूरा हो चुका है और अब रिपोर्ट (सर्वे रिपोर्ट) कोर्ट को भेज दी जाएगी.”
अखिलेश ने आगे कहा कि 22 नवंबर को लोग नमाज अदा करने के लिए जामा मस्जिद पहुंचे लेकिन पुलिस प्रशासन ने बैरिकेड लगे दिए ताकि लोग नमाज न पढ़ सके. उसके बाद भी लोगों ने संयम रखा और किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ. “23 नवंबर को पुलिस प्रशासन ने कहा कि अगली सुबह 24 तारीख को दूसरा सर्वे किया जाएगा. पुलिस प्रशासन को यह आदेश किसने दिया? वहीं, जब लोगों ने सर्वे का कारण जानना चाहा तो सर्किल ऑफिसर ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और लाठीचार्ज करवा दिया.
अखिलेश यादव ने आगे कहा, “इसका विरोध करते हुए कुछ लोगों ने पत्थर चलाए. जवाब में पुलिस कांस्टेबल से लेकर अधिकारी तक सभी ने अपने सरकारी और निजी हथियारों से गोलियां चलाई. इसका वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है. इससे कई लोग घायल हुए. 5 निर्दोष लोगों की मौत हो गई. संभल का माहौल खराब करने के लिए पुलिस और प्रशासन के लोगों के साथ-साथ याचिका दायर करने वाले लोग भी जिम्मेदार हैं. ऐसे में उन्हें भी निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए ताकि लोगों को न्याय मिल सके एवं भविष्य में कोई भी संविधान के खिलाफ ऐसी गैरकानूनी घटना न कर सके.”
हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
