5 महीने की चचेरी बहन से दुष्कर्म, हत्या के मामले में शख्स को कोर्ट ने दी मौत की सज़ा, कहा – “यहां तक कि जानवर भी ऐसा काम नहीं करेंगे..”

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प्रतीकात्मक फोटो

The Hindi Post

लखनऊ | लखनऊ की एक पोक्सो अदालत ने अपनी पांच महीने की चचेरी बहन से बेरहमी से दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करने के मामले में एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है। न्यायाधीश अरविंद मिश्रा ने कहा कि उच्च न्यायालय से मौत की सजा की पुष्टि के बाद दोषी को फांसी की सजा दी जाए।

न्यायाधीश ने गुरुवार को दोषी पर 70,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसकी पहचान प्रेम चंद्र उर्फ पप्पू दीक्षित के रूप में हुई, जो एक बच्चे का पिता भी है।

जज ने कहा कि जुर्माने की राशि नाबालिग पीड़िता के पिता को दी जाए।

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इससे पहले जज ने दोषी को मौत की सजा से कम की कोई सजा देने से इनकार कर दिया था। न्यायाधीश ने कहा, “मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है और दोषी के लिए मौत की सजा से कम कुछ भी नहीं है, जिसने न केवल पांच महीने और 13 दिन की बच्ची से दुष्कर्म किया बल्कि उसकी हत्या भी की।”

जज ने अपने फैसले में निर्भया और हैदराबाद के मामलों का भी हवाला दिया और कहा कि उन मामलों में पीड़िता बड़ी थी तब भी दोषियों को मौत की सजा दी गई थी।

हालांकि, इस मामले में पीड़िता नाबालिग है और मृतक की करीबी रिश्तेदार भी है और इसलिए दया की कोई गुंजाइश नहीं है।

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न्यायाधीश ने कहा, “यहां तक कि जानवर भी ऐसा काम नहीं करेंगे जैसा कि दोषी ने नाबालिग पीड़ित के साथ किया।”

न्यायाधीश ने यह भी कहा, “जिस तरह से दोषी ने अपराध किया, लोग किसी भी रिश्ते में विश्वास करना बंद कर देंगे और यह सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर देगा।”

नाबालिग मृतक के पिता ने इस मामले में 17 फरवरी, 2020 को मड़ियां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी पिछले दिन अपनी मां और अन्य लोगों के साथ पास के एक समारोह में शामिल होने गई थी।

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आरोपी ने उसकी मां से उसे कुछ समय के लिए लड़की को ले जाने की अनुमति देने के लिए कहा है। जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो उसकी मां और अन्य लोगों ने बेटी और दोषी की तलाश शुरू कर दी।

बाद में बच्ची एक झाड़ी में मिली और दोषी वहां से भागता नजर आया। बच्ची के प्राइवेट पार्ट और पूरे शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

आईएएनएस

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