दीपावली पर मां लक्ष्मी के इस मंदिर की चमक देख रह जाएंगे हैरान, 1.5 टन से ज्यादा सोने से बना है पूरा परिसर

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The Hindi Post

दीपावली पर मां लक्ष्मी के इस मंदिर की चमक देख रह जाएंगे हैरान, 1.5 टन से ज्यादा सोने से बना है पूरा परिसर

 

मुंबई | दीपावली का त्योहार आते ही हर तरफ मां लक्ष्मी की पूजा और उनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. घरों में दीप जलाए जाते हैं, रंगोली सजाई जाती है और लोग सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है. देश में उनके कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन तमिलनाडु के वेल्लोर में बना श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर अपनी खूबसूरती और खास बनावट के कारण सबसे अलग है. इसे श्रीपुरम गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है.

इस मंदिर की खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा सोने से सजा हुआ है. दूर से देखने पर इसकी चमक लोगों का ध्यान खींचती है.

श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर के पास थिरुमलाइकोडी इलाके में स्थित है. यह करीब 100 एकड़ में फैला हुआ है. मंदिर का निर्माण श्री नारायणी पीठम ट्रस्ट ने कराया है और साल 2007 में इसकी स्थापना की गई थी. इस मंदिर को गोल्डन टेंपल कहने की सबसे बड़ी वजह इसकी सोने से की गई सजावट है. मंदिर को बनाने में 1.5 टन से ज्यादा सोने का इस्तेमाल किया गया है.

वेल्लोर जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक, मंदिर पर करीब 1,500 किलो सोने की परत चढ़ाई गई है. इसकी सजावट में कारीगरों ने काफी बारीकी से काम किया है. सोने को पहले पतली पन्नियों में बदला गया और फिर हाथ से नक्काशी की गई तांबे की प्लेटों पर लगाया गया. मंदिर की दीवारों, छत और दूसरे हिस्सों पर की गई कलाकारी में पारंपरिक मंदिर शैली की झलक मिलती है. यहां की नक्काशी में धार्मिक प्रतीकों और वैदिक परंपरा से जुड़े डिजाइन भी दिखाई देते हैं. सोने की चमक के साथ इन बारीक डिजाइनों को देखना अपने आप में खास अनुभव है.

मंदिर की एक और खास बात यहां तक पहुंचने का रास्ता है. मुख्य मंदिर एक सितारे के आकार में बने रास्ते के बीचोंबीच स्थित है. श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है.

श्री नारायणी पीठम की वेबसाइट के अनुसार, यह रास्ता करीब 1.8 किलोमीटर लंबा है. इसके दोनों ओर हरियाली और खूबसूरत प्राकृतिक नजारे हैं. रास्ते में जगह-जगह जीवन, सच्चाई, अच्छे कर्म और मानवता से जुड़े संदेश भी लिखे गए हैं. श्रद्धालु चलते हुए इन संदेशों को पढ़ते हैं और उनके बारे में सोचते हैं.

मंदिर परिसर में सर्वतीर्थम नाम का एक पवित्र जलकुंड भी है. कहा जाता है कि देश की प्रमुख नदियों का पवित्र जल यहां एक साथ लाया गया है. इसे परिसर के खास आकर्षणों में गिना जाता है. मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और यह जलकुंड यहां आने वाले लोगों को शांति महसूस करने का मौका देते हैं.

मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मंदिर को जाति, धर्म, समुदाय और नस्ल के भेदभाव से ऊपर उठकर पूरी मानवता के लिए तैयार किया गया है. यहां आने वाले लोग मां लक्ष्मी के दर्शन करने के साथ कुछ समय शांति से बिता सकते हैं. यही वजह है कि यहां सिर्फ आसपास के इलाकों से ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.

By IANS

 


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