अनोखा चमत्कार: बारिश से 7 दिन पहले ही टपकने लगती है इस मंदिर की छत, सदियों बाद भी….
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अनोखा चमत्कार: बारिश से 7 दिन पहले ही टपकने लगती है इस मंदिर की छत, सदियों बाद भी…..
कानपुर | उत्तर प्रदेश के कानपुर के बेहटा गांव में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जिसके बारे में सुनकर शायद आपको भी यकीन करना मुश्किल हो जाए. कहा जाता है कि बारिश आने से करीब सात दिन पहले ही इस मंदिर की छत से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं. खास बात यह है कि उस समय आसपास बारिश का कोई नामोनिशान नहीं होता. यही वजह है कि सदियों से यह मंदिर लोगों के लिए आस्था के साथ-साथ रहस्य का भी केंद्र बना हुआ है.
यह मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है और कानपुर जिले के भीतरगांव ब्लॉक मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर बेहटा गांव में स्थित है. स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि जैसे ही बारिश का समय नजदीक आता है, मंदिर की छत के अंदर से पानी की छोटी-छोटी बूंदें दिखाई देने लगती हैं. बूंदों का टपकना लोगों के लिए आने वाली बारिश का संकेत माना जाता है.
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा होता क्यों है? क्या मंदिर की बनावट में कोई ऐसी खासियत है, जो मौसम में होने वाले बदलाव को पहले ही महसूस कर लेती है? या फिर इसके पीछे कोई प्राकृतिक प्रक्रिया है? इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कई बार की गई, लेकिन आज तक इस रहस्य पर से पूरी तरह से पर्दा नहीं उठ पाया है.
पुरातत्व विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने भी मंदिर से जुड़ी कई जांच और सर्वे किए हैं. इसके बावजूद मंदिर के निर्माण का सही समय और छत से बारिश से पहले पानी टपकने की घटना का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका. इतना जरूर माना जाता है कि मंदिर का आखिरी बड़ा जीर्णोद्धार 11वीं सदी के आसपास हुआ था.
इसके अलावा, कानपुर नगर के भीतरगांव में भारत का सबसे पुराना ईंटों से बना मंदिर मौजूद है जो गुप्त काल का है. 5वीं-6वीं सदी के आसपास बना यह शानदार मंदिर अपने टेराकोटा पैनल और ईंटों की बारीक कारीगरी के लिए जाना जाता है.
भीतरगांव का प्राचीन ईंटों वाला मंदिर सिर्फ एक स्मारक ही नहीं, बल्कि भारतीय मंदिर वास्तुकला के विकास का एक अहम अध्याय भी है.
By IANS
बारिश से 7 दिन पहले टपकने लगती है इस मंदिर की छत, सदियों बाद भी रहस्य बरकरार
