राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित किया, बोले – “खत्म, टाटा, बाय-बाय…”, ऐसा क्यों बोले कांग्रेस सांसद

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फोटो: आईएएनएस

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राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित किया, बोले – “खत्म, टाटा, बाय-बाय…”, ऐसा क्यों बोले कांग्रेस सांसद

 

प्रयागराज के केपी ग्राउंड में शनिवार को छात्रों को संबोधित करने पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक पुराना और चर्चित अंदाज फिर से देखने को मिला. भाषण के दौरान उन्होंने अपने पुराने वीडियो का मशहूर वाक्य “खत्म, टाटा, बाय-बाय” दोहराते हुए कहा कि देश के मौजूदा ‘सिस्टम को खत्म, टा-टा, बाय-बाय करना है.’ जैसे ही उन्होंने यह कहा, मैदान में मौजूद छात्र-युवा झूम उठे और जोरदार नारेबाजी की. युवाओं के उत्साह को देखकर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए इस बात को दोबारा दोहराया.

राहुल गांधी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नफरत के बजाय ‘प्यार और मोहब्बत’ के जरिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव लाएं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं की इस लड़ाई में वे उनके साथ मुस्तैदी से खड़े हैं और आगे भी रहेंगे.

मंच पर लगी तस्वीरों की ओर इशारा कर साधा निशाना

संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने युवाओं के सामने ‘दर्द, डेटा और दौलत’ का मुद्दा उठाया. उन्होंने मंच पर लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए कहा, “डेटा आपका, दर्द आपका, लेकिन दौलत इनकी? यही वह सिस्टम है जिसे बदलने की जरूरत है.”

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि क्षमता और प्रतिभा युवाओं की होने के बावजूद मौजूदा तंत्र ने उन्हें चक्रव्यूह में फंसा रखा है. इस व्यवस्था ने रोजगार के अवसर खत्म किए, विश्वविद्यालयों पर कब्जा जमाया और छात्रों के अधिकारों पर आक्रमण किया है. दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपने डर का सामना कर अंधेरे में रोशनी जलाई है और अपनी आवाज नफरत के बजाय मोहब्बत के साथ उठाई है.

‘रील देखना 21वीं सदी का नया नशा’

सत्य और अहिंसा को भारत की मूल संस्कृति बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि युवाओं को किसी के प्रति मन में नफरत रखे बिना ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलनी है. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में डेटा देश की सबसे बड़ी संपत्ति और ताकत है जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का निर्माण हो रहा है. राहुल ने आरोप लगाया कि युवाओं द्वारा तैयार किया गया डेटा बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपा जा रहा है और देश के युवाओं को रील्स देखने व बनाने में उलझाया जा रहा है.

डिग्री मिल रही पर रोजगार की गारंटी नहीं

राहुल गांधी ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि हर साल परिवारों से पढ़ाई के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये लिए जाते हैं लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली डिग्री रोजगार की कोई गारंटी नहीं देती. सरकार की गलत नीतियों के कारण मैन्युफैक्चरिंग, सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारी नौकरियों के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता और युवाओं का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए राजनीतिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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