युगांडा से भारत आई महिला की हुई मेडिकल जांच, क्या निकला उसकी इबोला रिपोर्ट में ? सरकार ने जारी किया बयान
युगांडा से भारत आई महिला की हुई मेडिकल जांच, क्या निकला उसकी इबोला रिपोर्ट में ? सरकार ने जारी किया बयान
भारत सरकार ने बुधवार को बताया कि देश में इबोला वायरस से जुड़ा एक भी मामला नहीं है. सरकार को यह स्पष्टीकरण इसलिए देना पड़ा क्योंकि युगांडा से भारत आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण देखे गए थे. हालांकि बाद में महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई.
महिला 23 मई को बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंची थी. जिसके बाद उसे एहतियातन सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया. महिला के शरीर में हल्का दर्द था हालांकि अब वह पूरी तरह स्वस्थ है.
अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है. महिला के संपर्क में आए लोगों की भी पहचान की जा रही है.
अफ्रीकी देश कांगो से फैला वायरस युगांडा तक पहुंच गया है. युगांडा में इबोला के 8 मामले सामने आ चुके हैं.
पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है. इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था. उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे.
कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया. यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है.
कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है. 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. हालांकि, WHO का कहना है कि यह महामारी की कैटेगरी में नहीं आता है.
कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के मुताबिक, पहला मामला एक नर्स का माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी. बीमारी फिलहाल इतुरी प्रांत के बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों तक पहुंच चुकी है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन के रहे हैं. इससे चिंता बढ़ी है, क्योंकि इबोला के मौजूदा कई इलाज और टीके जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे.
