“मिट गए सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले….”, चुनाव के नतीजों के बाद राजा भैया ने लिखा यह पोस्ट, किस पर साधा निशाना?

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राजा भैया (फाइल फोटो | आईएएनएस)

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“मिट गए सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले….”, चुनाव के नतीजों के बाद राजा भैया ने लिखा यह पोस्ट, किस पर साधा निशाना?

 

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की सियासी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है. 4 मई 2026 को घोषित नतीजों में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. इस राजनीतिक उलटफेर के बाद अब बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है जिसमें सनातन धर्म से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया है.

उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में हैं. उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर चुनाव परिणामों की ओर इशारा करते हुए लिखा— “मिट गए सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले.” राजा भैया की यह टिप्पणी तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के उस पुराने बयान पर आधारित है जिसने देश भर में विवाद खड़ा कर दिया था.

क्या था उदयनिधि स्टालिन का बयान?

उदयनिधि स्टालिन ने साल 2023 में एक कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी. उन्होंने तर्क दिया था कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के विरुद्ध है, इसलिए इसका केवल विरोध करना काफी नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए. उन्होंने सनातन को समाज को जातियों में बांटने वाला विचार बताया था.

पुरानी तल्खी और नई हलचल

राजा भैया ने उस समय भी स्टालिन के बयान को हिंदुओं के प्रति घृणा करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A) की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे. अब चुनावी नतीजों के बहाने राजा भैया ने फिर से उसी मुद्दे को हवा दे दी है जिससे तमिलनाडु से लेकर उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि डीएमके की इस हार को सनातन विरोधी छवि से जोड़कर देखा जा रहा है.

 

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