भारत के लिए राहत भरी खबर, एलपीजी से लदे दो भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रवाना
सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)
भारत के लिए राहत भरी खबर, एलपीजी से लदे दो भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रवाना
नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक दो एलपीजी टैंकर जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. इन जहाजों में करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है.
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि इन टैंकरों के भारत पहुंचने के लिए क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह निर्धारित किए गए हैं. उनके मुताबिक, शिवालिक के 16 मार्च और नंदा देवी के 17 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है.
उन्होंने बताया कि इन दोनों जहाजों के सुरक्षित पार होने के बाद अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं जिनमें कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं.
सिन्हा ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि पहले इस क्षेत्र में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद थे जिनमें से दो जहाज सुरक्षित रूप से आगे बढ़ चुके हैं.
ये दोनों एलपीजी टैंकर शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधीन है.
इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने शनिवार को कहा कि तेहरान ने कुछ भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है. हालांकि उन्होंने इससे जुड़े संचालन संबंधी अधिक विवरण साझा करने से इनकार कर दिया.
दिल्ली में आयोजित एक कॉन्क्लेव के दौरान सवाल के जवाब में फतहाली ने कहा, “हां, हमने अनुमति दी है, लेकिन मैं यह नहीं बताऊंगा कि कितने जहाजों को और कितने समय के लिए. भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंध हैं और एक राजदूत के तौर पर मैंने इस मुद्दे पर अपनी पूरी कोशिश की है. कुछ देरी हुई, लेकिन आखिरकार यह संभव हो गया.”
आईएएनएस सूत्रों के अनुसार, दो एलपीजी टैंकरों के सुरक्षित पार होने के बाद अब और भी जहाज युद्ध प्रभावित क्षेत्र से गुजरने के लिए कतार में हैं, क्योंकि ईरान ने भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने की अनुमति दी है.
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है.
