ईरान पर हमले के बाद अमेरिका के पक्ष में आया यह बड़ा ईरानी नेता, कही यह बात…
सांकेतिक तस्वीर (Image: X/Grok)
ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान पर अमेरिका ने हमला किया है. इन हमलों के लिए ईरान के एक निर्वासित नेता ने इस्लामिक रिपब्लिक की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर खामेनेई के इस्तीफे की मांग की है और कहा कि शांति एकमात्र निश्चित रास्ता इस शासन का अंत है.
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा शाह पहलवी ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, ‘ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले इस्लामिक रिपब्लिक की परमाणु हथियारों की विनाशकारी खोज का रिजल्ट है, जिसने ईरानी जनता के हितों को ताक पर रखा. अली खामेनेई और उनका ढहता हुआ आतंकवादी शासन राष्ट्र को असफल कर चुका है.’

उन्होंने खामेनेई से अपील की, ‘अपने भूमिगत बंकर से जवाबी कार्रवाई पर विचार करने के बजाय, ईरानी जनता के हित में इस्तीफा दें, ताकि गौरवशाली ईरानी राष्ट्र इस्लामिक रिपब्लिक के विनाशकारी दौर को पीछे छोड़कर शांति, समृद्धि और महानता का नया अध्याय शुरू कर सके.’
रेजा शाह ने जोर देते हुए कहा कि देश में शांति बहाल करने का एकमात्र निश्चित तरीका ये है कि इस व्यवस्था (खामेनेई शासन) का अंत हो जाए.
दरअसल, 22 जून 2025 को अमेरिका ने बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों के जरिए ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला किया. हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को बेहद सफल बताया और कहा कि हमारे सभी विमान सुरक्षित ईरानी एयरस्पेस से बाहर निकाल आए.
इसी बीच ईरान ने इन हमलों के जवाब में इजरायल के 10 शहरों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए, जिसमें इजरायल की आर्थिक राजधानी तेल अवीव और हाइफा जैसे शहर शामिल हैं.
इजरायल के सरकारी प्रसारक कन के अनुसार, इन हमलों के बाद पूरे देश में हवाई हमले की चेतावनी सायरन बजाए गए. इजरायल ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, और एल अल व अर्किया एयरलाइंस ने उड़ानें निलंबित कर दी हैं. ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने अमेरिकी हमले को “गैरकानूनी” बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी.
इससे पहले रेज़ा शाह पहलवी ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की आलोचना की थी और कहा कि खामेनेई डरे हुए चूहे की तरह अंडरग्राउंड हो गए हैं, अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है.
निर्वासित प्रिंस ने ईरान की जनता से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक नाजुक मोड़ को पार करने की अपील की और कहा कि जो शुरू हुआ हैं, उसे बदला नहीं जा सकता उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का भविष्य बहुत उज्जवल है.
